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Sunday, October 11, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय में ‘सेवा रंग अभियान’ का भव्य आयोजन, तिरंगे के रंगों से साकार हुआ विकसित भारत का संकल्प


सुभारती में राष्ट्रभक्ति के रंगों से सजी मानव रंगोली, एकता और सेवा का दिया संदेश


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। राष्ट्रभक्ति, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय एकता की भावना को सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के शिक्षा संकाय के शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से जनरल मोहन सिंह खेल मैदान में ‘सेवा रंग अभियान–विकसित भारत के लिए एक रचनात्मक सामूहिक सहभागिता’ का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों, विभागों और महाविद्यालयों के लगभग 300 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इनमें 30 से अधिक संकाय सदस्य और 20 से अधिक गैर-शिक्षक कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सामाजिक उत्तरदायित्व, सामूहिक सहभागिता और जनसेवा की भावना को प्रोत्साहित करते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना रहा।


कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 108 मीटर व्यास वाले विशाल ‘भारत मंडल’ का निर्माण और भव्य मानव रंगोली रही। केसरिया, सफेद और हरे रंगों के आकर्षक संयोजन से साकार हुई इस अनूठी संरचना ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। तिरंगे के रंगों से सजे भारत मंडल ने देश की सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रीय अखंडता और साझा पहचान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इसमें प्रतिभागियों की एकजुटता ने यह संदेश दिया कि राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, सामूहिक प्रयास और नागरिकों के साझा संकल्प में निहित है।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुभारती विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने सामूहिक सहभागिता, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील, अनुशासित, जिम्मेदार और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाना भी है। विद्यार्थियों में सेवा भावना, सहयोग, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक चेतना विकसित करना समय की आवश्यकता है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में योगदान देने के लिए प्रेरित करते हैं।


उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएगा। छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयास, सामूहिक सहयोग और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण ही बड़े बदलावों की नींव रखते हैं। युवाओं की ऊर्जा, शिक्षकों का मार्गदर्शन और कर्मचारियों का समर्पण मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं, जो ज्ञान, नवाचार, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करे।


विश्वविद्यालय के कुलसचिव ग्रुप कैप्टन एम.याकूब एम-इन-डी (सेनि.) ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, समन्वय और सामूहिक प्रयासों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब विभिन्न विभागों, संकायों और कर्मचारियों के सदस्य एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं, तो उनकी सहभागिता किसी आयोजन को सफल बनाने के साथ-साथ संस्थागत एकता और राष्ट्रीय चेतना का भी सशक्त उदाहरण बनती है। उन्होंने सामूहिक गतिविधियों को सहयोग, परस्पर सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताया। उनके अनुसार, राष्ट्र की प्रगति के लिए प्रत्येक व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है और जब व्यक्तिगत प्रयास सामूहिक संकल्प का हिस्सा बनते हैं, तो परिवर्तन की संभावनाएं और अधिक व्यापक हो जाती हैं।


कार्यक्रम का शुभारंभ शारीरिक शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू अधिकारी के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों, संकाय सदस्यों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और विद्यार्थी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ‘सेवा रंग अभियान’ के उद्देश्यों एवं उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों को राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सहभागिता, अनुशासन और टीम भावना का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती हैं। सामूहिक प्रयासों से तैयार भारत मंडल केवल एक कलात्मक संरचना नहीं, बल्कि देश की एकता, अखंडता और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है।


इस अवसर पर शिक्षा संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं महाविद्यालयों के डीन और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की योजना, समन्वय और सफल क्रियान्वयन में शारीरिक शिक्षा विभाग के संकाय सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और महाविद्यालयों के सहयोग से आयोजन को सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली स्वरूप प्रदान किया गया।


अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने निर्धारित रंग-विन्यास के अनुरूप केसरिया, सफेद और हरे रंगों के माध्यम से तिरंगे की भावना को साकार किया। रंगों के इस सामूहिक संयोजन ने भारत की सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रीय अखंडता और साझा विरासत का सुंदर संदेश दिया। प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने यह भी दर्शाया कि जब अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक उद्देश्य के लिए साथ आते हैं, तो उनकी सामूहिक शक्ति किसी भी सकारात्मक पहल को व्यापक प्रभाव प्रदान कर सकती है।


‘सेवा रंग अभियान’ केवल एक रचनात्मक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक सेवा और सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना का जीवंत उत्सव बनकर उभरा। शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों या व्यक्तिगत उपलब्धियों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और जनसेवा जैसे क्षेत्रों में नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास देश की प्रगति को नई दिशा दे सकते हैं।


स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करने वाली साबित हुई। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह हमारे व्यवहार, कर्तव्यों और समाज के प्रति किए जाने वाले कार्यों में भी दिखाई देनी चाहिए। सेवा, सहयोग, अनुशासन और एकता को जीवन का हिस्सा बनाकर ही एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत की जा सकती है ।

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