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Saturday, October 10, 2026

प्रथमं शैलपुत्री (घनाक्षरी छंद) —सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

 
नित्य संदेश

प्रथमं शैलपुत्री

शैल की सुता दुलारी,

भवानी हैं सुखकारी,

नित्य-नित्य बलिहारी,

मां शरण लीजिए।


वृषभ निज सवारी, 

कमल, त्रिशूल धारी,

मां-मां श्रद्धालु करते,

दया-दृष्टि कीजिए।


मेष, कर्क, वृश्चिक राशि, 

निर्बल बने साहसी,

लाल बाती ज्योत जले,

शक्ति-भक्ति दीजिए।


रोग, शोक, कष्ट हारे,

दुर्गा मां के जयकारे,

'सपना' लिखती यश,

शैलपुत्री रीझिए।


—सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

समाचार संपादक, नित्य संदेश 


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