नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान में ‘हिंदी पखवाड़ा जागरूकता अभियान’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘विधि शिक्षा एवं न्याय प्रणाली में भारतीय भाषाओं की भूमिका’ रहा। कार्यक्रम माननीय न्यायमूर्ति राजेश चंद्र, पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, डीन, फैकल्टी ऑफ लॉ के निर्देशन में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों को पौधे भेंट कर किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. (श्रीमती) आलोक शर्मा ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधिक शिक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में भाषा का सरल, स्पष्ट और सहज होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न न्याय-निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि आमजन तक न्याय की समझ पहुंचाने में सरल भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि हिंदी का सम्मान और प्रयोग केवल हिंदी दिवस तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष इसे ससम्मान व्यवहार में लाया जाना चाहिए।
वही वरिष्ठ अधिवक्ता श्री चरण सिंह त्यागी ने कहा कि किसी व्यक्ति के ज्ञान और बौद्धिक क्षमता का आकलन किसी एक भाषा के आधार पर नहीं किया जा सकता। उन्होंने विद्यार्थियों को विधिक सिद्धांतों की मजबूत समझ विकसित करने तथा देश की भाषाई विविधता का सम्मान करने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, डीन, फैकल्टी ऑफ लॉ ने अपने संदेश में कहा कि विधि का उद्देश्य केवल कानून का ज्ञान देना नहीं, बल्कि न्याय को प्रत्येक व्यक्ति तक सहज और प्रभावी रूप से पहुंचाना भी है। इसके लिए भाषा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में विधिक शिक्षा को बढ़ावा देने से विद्यार्थियों में कानून की बेहतर समझ विकसित होगी और आम नागरिक भी अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को अधिक आसानी से समझ सकेंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी सहित भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान रखते हुए विधिक क्षेत्र में सरल, स्पष्ट और जन सुलभ भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान भाषा, विधि शिक्षा, अधिवक्तृत्व तथा न्याय तक पहुंच के बीच संबंधों पर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय भाषाएं न्याय और विधि की जटिल अवधारणाओं को सरल एवं सुगम बनाने का प्रभावी माध्यम हैं। विद्यार्थियों ने भी विषय से जुड़े सवाल पूछे और अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर शिक्षक, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


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