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Thursday, October 1, 2026

महात्मा गांधी उन जड़ों को काटना चाहते थे, जो मानवता को समाप्त करना चाहती थीं : प्रो. सगीर अफ़राहीम



चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में ‘अहिंसा का दर्शन और गांधी जी’ विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। “गांधी जी यदि महात्मा बुद्ध से प्रभावित थे तो वे इस्लाम धर्म से भी काफी प्रभावित दिखाई देते हैं। मौलाना जौहर हों या मौलाना हसरत मोहानी, सभी ने गांधी जी को स्वतंत्रता संग्राम का योद्धा माना है। महात्मा गांधी उन जड़ों को काटना चाहते थे, जो मानवता को समाप्त करना चाहती थीं। आज प्रत्येक हिंदुस्तानी को अहिंसा की आवश्यकता है। जिस घर में मां अपने बच्चे को अहिंसा की शिक्षा देती है, वह अपने बच्चे के साथ-साथ दूसरे बच्चों को भी डांट देती है, क्योंकि हमारे लिए अहिंसा ही सबसे आवश्यक है।”


ये विचार प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं आलोचक प्रोफेसर सगीर अफ़राहीम ने आयुसा और उर्दू विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘अहिंसा का दर्शन और गांधी जी’ विषयक ऑनलाइन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने आगे कहा कि प्रेमचंद ने ‘माँ’ और ‘कातिल की माँ’ नामक दो कहानियाँ लिखीं। एक कहानी हिंसा पर आधारित है, जबकि दूसरी अहिंसा पर। हम शांति, मानवता और भाईचारे से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में हम अपने बच्चों और अपने शोधार्थियों को किस प्रकार संस्कारित और शिक्षित कर सकते हैं? कार्यक्रम का शुभारंभ बी.ए. की छात्रा फक़ीहा ने पवित्र कुरआन की तिलावत से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता  प्रसिद्ध साहित्यकार एवं आलोचक प्रोफेसर सगीर अफ़राहीम ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर आराधना गुप्ता, इतिहास विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने भाग लिया।


विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. मोहम्मद अख़लाक, हेड, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स, इस्लामिया डिग्री कॉलेज, देवबंद; डॉ. जयवीर राणा, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग, सीसीएस विश्वविद्यालय, मेरठ तथा डॉ. महिपाल सिंह, विधि विभाग, सीसीएस विश्वविद्यालय, मेरठ उपस्थित रहे। शोध-पत्र प्रस्तुत करने वालों में डॉ. यज्ञेश कुमार, हिंदी विभाग, सीसीएस विश्वविद्यालय, मेरठ; डॉ. दीपक कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, एस.एस.वी. डिग्री कॉलेज, हापुड़; डॉ. मोहम्मद तल्हा कमाल, असिस्टेंट प्रोफेसर, उर्दू विभाग, इस्लामिया डिग्री कॉलेज, देवबंद तथा अनुराधा, शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, सीसीएस विश्वविद्यालय, मेरठ शामिल रहे। इस अवसर पर आयुसा की अध्यक्ष प्रोफेसर रेशमा परवीन भी उपस्थित रहीं। स्वागत भाषण डॉ. इरशाद स्यानवी ने दिया तथा कार्यक्रम का संचालन विभाग के शिक्षक डॉ. आसिफ अली ने किया।


कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने कहा कि गांधी जी ने अपना पूरा जीवन भारत के लोगों की सेवा करने और साझा संस्कृति को मजबूत करने में लगा दिया। आज पूरी दुनिया गांधी जी को शांति के दूत के रूप में देखती है। गांधी जी ने अपना पूरा जीवन देश की सेवा, हिंदू-मुस्लिम साझा संस्कृति को मजबूत करने और देश को स्वतंत्र कराने के लिए समर्पित कर दिया। गांधी जी द्वारा दिया गया अहिंसा का दर्शन अनेक लोगों ने अपनाया। इस दर्शन के माध्यम से दुनिया में शांति और सद्भाव स्थापित किया जा सकता है। उनके जीवन का एक-एक दिन लोगों की सेवा में बीता। गांधी जी के संबंध में अनेक लेख और पुस्तकें हमारे पाठ्यक्रम में शामिल हैं।


प्रोफेसर आराधना गुप्ता ने कहा कि गांधी जी का मानना था कि हम जैसा बीज बोएँगे, वैसा ही फल प्राप्त होगा। अहिंसा एक ऐसी तलवार है, जो हर दिशा में चलती है। अहिंसा के लिए शक्तिशाली होना आवश्यक है, क्योंकि जब कोई कमजोर व्यक्ति अहिंसा की बात करता है तो लोग उसका मजाक बनाते हैं। गांधी जी बहुत तेज चलते थे, यहाँ तक कि युवा भी उनसे पीछे रह जाते थे। इससे पता चलता है कि वे शारीरिक रूप से भी मजबूत थे। गांधी जी का कहना था कि मैं उस व्यक्ति को भी नहीं मारना चाहता, जो मुझे मारना चाहता है। उन्होंने 1921 में कहा था कि हमें अपने प्रति कठोर और दूसरों के प्रति सहानुभूतिशील होना चाहिए। गांधी जी मानते थे कि किसी को पीड़ा देना या परेशान करना भी हिंसा है।


अनुराधा ने अपना शोध-पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि महात्मा गांधी के दृष्टिकोण से देखा जाए तो ऐसा लगता है कि उन्होंने अहिंसा को विभिन्न भागों में विभाजित किया था। वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति को देखते हुए गांधी जी के विचारों पर अमल करना आवश्यक हो जाता है।


डॉ. यज्ञेश कुमार ने कहा कि हमें गांधी जी के अहिंसा दर्शन को अपने जीवन में अपनाना होगा। अनेक साहित्यकारों और कवियों ने गांधी जी के विचारों को अपनाया और उन पर अमल किया। सूरदास ने भी गांधी जी के दर्शन को अपनी कविता में प्रस्तुत किया। गांधी जी का कहना था कि हमें स्वदेशी को अपनाना होगा और अहिंसा के माध्यम से अंग्रेजों को देश से बाहर निकालना होगा। यदि हमें मानवता को सही दिशा दिखानी है तो गांधी जी के दर्शन को अपने जीवन में उतारना होगा।


डॉ. मोहम्मद तल्हा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक समस्याओं को दूर करने के लिए अहिंसा बहुत आवश्यक है। स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी ने इस दर्शन को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने अहिंसा को केवल धर्म तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज और समुदाय के कल्याण के लिए भी इसे आवश्यक बताया। गांधी जी ने भारतीयों की स्वतंत्रता के लिए अहिंसा को आवश्यक माना। भारत छोड़ो आंदोलन में गांधी जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच नैतिक शक्ति और सद्भाव बनाए रखना चाहते थे।


डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि धर्म के नाम पर किसी प्रकार की हिंसा न हो, इस विचार को गांधी जी ने विशेष रूप से सामने रखा। गांधी जी इसलिए भी प्रसिद्ध हैं कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर मानवता पर जोर दिया। महात्मा गांधी का मानना था कि हिंसा के माध्यम से हम देश से अंग्रेजों को नहीं निकाल सकते। ग्राम पंचायतों में पिछड़े वर्गों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी गांधी जी ने विशेष जोर दिया।


प्रोफेसर रेशमा परवीन ने कहा कि ऐसा कौन होगा जो गांधी जी के इस दर्शन से परिचित न हो। आज की पीढ़ी, विशेषकर सोशल मीडिया के दौर में, अहिंसा को समझना बहुत आवश्यक है। आयुसा का यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि प्रतिशोध के इस वातावरण को अहिंसा के माध्यम से दूर किया जा सकता है। यदि हमारे भीतर प्रेम है तो हमें हर प्रकार के विवाद और हिंसा से बचना होगा। सभी अतिथियों और शोध-पत्र प्रस्तुत करने वालों ने गांधी जी के दर्शन पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।


डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि गांधी जी के व्यक्तित्व के बारे में जितना पढ़ा और सुना जाए, कम है। जब गांधी जी ने कस्तूरबा से पूछा कि सभी महिलाएँ एक साथ आंदोलन में क्यों नहीं आतीं, तो उन्हें पता चला कि एक घर में केवल एक ही साड़ी होती थी, जिसे पहनकर महिलाएँ आंदोलन में आती थीं। इसी कारण गांधी जी ने भी तय किया कि वे स्वयं अपने शरीर पर अधिक कपड़े नहीं पहनेंगे। इस प्रकार गांधी जी ने पूरे भारत में अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया। डॉ. जयवीर राणा ने कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा गरीबों, मजदूरों और आम लोगों के कल्याण तथा देश की स्वतंत्रता के लिए जो कार्य किए, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। महात्मा गांधी का व्यक्तित्व ऐसा था कि आज भी भारत में विदेशों से कोई मंत्री, राष्ट्रपति या राजा आता है तो वह गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने जाता है।


डॉ. मोहम्मद अख़लाक ने कहा कि उर्दू साहित्य ने हमेशा भाईचारे, मानवता और प्रेम का संदेश दिया है और गांधी जी ने भी अपने प्रयासों से मानवता तथा प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों और आयुसा की पूरी टीम को कार्यक्रम के लिए बधाई दी। इस अवसर पर नूर जमशेदपुरी ने गांधी जी पर एक कविता भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम से डॉ. शादाब अलीम, डॉ. अलका वशिष्ठ, फरहत अख़्तर, मोहम्मद शमशाद, सईद अहमद सहारनपुरी सहित अन्य लोग जुड़े रहे।

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