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Friday, October 2, 2026

वरिष्ठ अधिकारी चक्रपाणि दत्त मिश्र की पुस्तक "कमेंट्री ऑन इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899" का गौरवमयी विमोचन

सपना सी.पी. साहू 

नित्य संदेश, इंदौर। शहर में आयोजित एक भव्य गौरवमयी समारोह में वरिष्ठ अधिकारी चक्रपाणि दत्त मिश्र (जिला पंजीयक एवं स्टाम्प कलेक्टर) द्वारा लिखित पुस्तक— "कमेंट्री ऑन इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899 (एज एप्लीकेबल टू द स्टेट ऑफ एम.पी.)" का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। खेत्रपाल लॉ हाउस, इंदौर द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक स्टाम्प विधि व प्रशासनिक क्षेत्र के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जा रही है।


समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसके बाद बेबी अलायना ने गणेश वंदना और आकांक्षा जाचक शेट्टी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मंचासीन अतिथियों, सभागार में बड़ी संख्या में उपस्थित प्रशासनिक/राजस्व अधिकारियों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, सर्विस प्रोवाइडर्स का शब्द पुष्प से स्वागत इंदौर परिक्षेत्र के डी.आई.जी. रजिस्ट्रेशन श्री उमाशंकर बाजपेयी ने किया। उन्होंने कहा कि लेखक द्वारा पद पर रहते हुए अपने अनुभवों के आधार पर की गई यह कमेंट्री सर्वहितकारी और उपयोगी साबित होगी। 


इसके पश्चात अतिथियों द्वारा मंच पर बनी आदमकद पुस्तक का पर्दा हटाकर औपचारिक अनावरण किया गया।


लेखक चक्रपाणि दत्त मिश्र ने बताया कि मध्यप्रदेश में 'संपदा परियोजना' के जरिए कागज रहित कार्य करते हुए त्वरित पीडीएफ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि विधिक विवेक, स्वांतःसुखाय तथा समाज-सुखाय हेतु 1200 पृष्ठों की इस पुस्तक की रचना की गई है, जिसमें 101 केस स्टडीज, व्यावहारिक समस्याएँ व उनके समाधान शामिल हैं। अधिनियम पर न्याय निर्णयों की कठिन शब्दावली के बीच सेतु बनने के लिए इस पुस्तक को लिखा गया है ताकि लोक प्राधिकारी, अधिवक्ता, न्यायाधीश, विधि के विद्यार्थी और आम नागरिक इसे सरलता से समझ सकें।


गेस्ट ऑफ़ ऑनर, इंदौर के संभागायुक्त (IAS) श्री भास्कर लक्षकार ने कहा कि पद पर रहते हुए किताब लिखना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक प्रशासनिक स्तर के साथ-साथ एवं आम जनता के स्तर पर आने वाली स्टाम्प ड्यूटी संबंधी कठिनाइयों के निवारण में यह पुस्तक सहायक साबित होगी तथा एक सच्चे एवं प्रभावी संदर्भ ग्रन्थ की तरह स्टाम्प शुल्क की प्रभार्यता संबंधी दुविधाओं को दूर कर सही मार्गदर्शन करेगी।

पुस्तक पर चर्चा में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान ने इसे विधि के क्षेत्र में 'मील का पत्थर' करार दिया। वहीं पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री मनोज द्विवेदी ने कहा कि लिटिगेशन को कम करने तथा स्टाम्प ड्यूटी व रजिस्ट्रेशन की समस्याओं को सुलझाने में यह अनुभव-आधारित पुस्तक अत्यंत कारगर होगी।


भोपाल से पधारें विशिष्ट अतिथि स्वप्नेश शर्मा (सीनियर डिस्ट्रिक्ट रजिस्ट्रार, भोपाल एवं संपदा के परियोजना अधिकारी ) ने बताया कि इंदौर जिला अकेले 25% राजस्व देता है और लेखक के 30 वर्षों के अनुभवों से राज्य की अर्थव्यवस्था व टैक्स कलेक्शन को समृद्धि मिलेगी।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री जितेंद्र कुमार माहेश्वरी ने 1200 पेजेज की इस पुस्तक को प्रशासनिक व कानूनी संदर्भों के लिए अत्यंत उपयोगी ग्रंथ बताया और एक संक्षिप्त 'लघु रिफरेंस बुक' लिखने का सुझाव भी दिया।


कार्यक्रम का मंच संचालन प्रसिद्ध कवयित्री व शिक्षिका प्रीति दुबे एवं डॉ. अमरेश नायडू (वरिष्ठ जिला पंजीयक एवं स्टाम्प कलेक्टर) द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत कनिष्क मिश्र, डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र, सिद्धार्थ मिश्र, इंदू मिश्र, डॉ.पीयूष मिश्र, निष्ठा मिश्र, आकांक्षा जाचक शेट्टी और नीतेश शेट्टी ने किया। 


अंत में डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र ने आभार व्यक्त किया, जिसके बाद राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रदेश के कई क्षेत्रों से पधारे प्रशासनिक अधिकारी, पंजीयन अधिकारी, अधिवक्ता गण, ईष्ट मित्र, शुभचिंतक आदि उपस्थित रहे।

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