नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में स्ववित्तपोषित पदों पर नियुक्तियों में आरक्षण नियमों के उल्लंघन के संबंध में की गई शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार ने गंभीर संज्ञान लिया है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 18 अगस्त 2026 को प्राप्त शिकायत के आधार पर मामले की जांच/पूछताछ करने का निर्णय लिया है। आयोग द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति को नोटिस जारी कर संबंधित आरोपों एवं मामले में की गई कार्रवाई के संबंध में 15 दिनों के भीतर तथ्य एवं सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयावधि में जवाब प्राप्त नहीं होने पर आयोग संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत उसे प्राप्त सिविल न्यायालय जैसी शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए समन जारी कर सकता है।
शशिकांत गौतम ने कहा कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों में आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों एवं नियमों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर आरक्षण नियमों की अनदेखी हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा मामले में जांच का निर्णय लिया जाना सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय आयोग को निर्धारित समय में सभी अभिलेख एवं तथ्य उपलब्ध कराएगा तथा मामले की निष्पक्ष जांच में सहयोग करेगा।
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