अशोक सोम
नित्य संदेश, आबू रोड। ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्वविद्यालय, आबू रोड के ज्ञान सरोवर में चल रहे पांच दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया महासम्मेलन 2026 के आध्यात्मिक सत्र में ब्रह्माकुमारी दीदी ने मन, आत्मा और विचारों की शक्ति पर प्रवचन देते हुए कहा कि शरीर को जीवन प्रदान करने वाली ऊर्जा ही आत्मा है। आत्मा एवं शरीर दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
डॉक्टर बीके सविता ब्रह्माकुमारीज़ दीदी ने कहा कि हमारा शरीर प्रकृति के पांच तत्वों - धरती, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है। यदि शरीर में आत्मा नहीं है तो जीवन शून्य है, वह शव है। यह शरीर विनाशी है, इसीलिए कहा जाता है कि यह माटी का तन है और माटी में मिल जाएगा, लेकिन आत्मा अजर-अमर है, वह पुराने वस्त्र की तरह इस शरीर को छोड़कर नया शरीर धारण करती है।
आत्मा के तीन अंग - मन, बुद्धि और संस्कार
आत्मा के तीन अंग हैं - मन, बुद्धि और संस्कार। मन में विचार शक्ति, कल्पना शक्ति, इच्छा शक्ति और अनुभव करने की शक्ति है। यह दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे हम सबसे कम पहचानते हैं। यदि मन को सही दिशा दी जाए तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है। बुद्धि परखने और निर्णय लेने की शक्ति है। दीदी ने कहा कि मन एवं बुद्धि के बीच हमेशा द्वंद्व चलता रहता है। मन कहता है - यह करना है, बुद्धि कहती है - यह नहीं करना है। जब मन बुद्धि पर हावी हो जाता है तब व्यक्ति गलत निर्णय ले लेता है। मन की गति बहुत तेज है और इसे हम वेस्ट थॉट कहते हैं। जो बीत गया वह तो है ही नहीं, लेकिन उसी बीते हुए दुख को हम वर्तमान में भी अनुभव करते हैं। इसीलिए कहा जाता है - Past is History, Future is Mystery and Present is Gift। हमारे केवल 15 प्रतिशत विचार ही वर्तमान के होते हैं, बाकी या तो भूतकाल में भटकते हैं या भविष्य की चिंता में रहते हैं।
दुनिया में बढ़ रही आत्महत्याएं - कारण नकारात्मक विचार
दीदी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज दुनिया में सुसाइड करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण नकारात्मक विचारों का मन पर हावी होना है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार से जुड़े विचार ही नकारात्मक विचार हैं, जो विष के समान हैं।
नकारात्मक विचारों से अशांति और तनाव
लगातार नकारात्मक विचारों से मन में अशांति और तनाव पैदा होता है। तलवार का घाव तो भर जाता है, लेकिन नकारात्मक विचार का घाव कभी नहीं भरता। नकारात्मक विचार आत्मा की शक्ति को खत्म कर देता है। विश्व में बढ़ रहे चरित्र पतन के मामलों का कारण भी यही नकारात्मक सोच है। दीदी ने कहा कि नकारात्मक खबरें हमारे मन को कमजोर बनाती हैं। इसीलिए हमारे पूर्वज दूरदर्शी थे, वे नकारात्मकता से बचने के लिए सुबह पूजा-आराधना और धार्मिक क्रियाओं में लीन रहते थे।
कस्तूरी मृग का उदाहरण - शांति अंदर है
बहुत सुंदर उदाहरण देते हुए दीदी ने कहा कि जैसे कस्तूरी हिरण की नाभि में ही कस्तूरी की सुगंध होती है, लेकिन वह अज्ञानता के कारण उसे जंगल में भटक कर खोजता है, ठीक वैसे ही शांति बाहर से आने वाली चीज नहीं है। शांति अपने मन के अंदर से ही पैदा होती है।
दिशा बदलो तो दशा बदल जाएगी
दीदी ने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है - किसी भी चीज की दिशा बदल दो तो दशा बदल जाती है। मन को स्थिर रखने के लिए नकारात्मक विचारों को बदलना जरूरी है। नकारात्मक विचारों को बदलकर सकारात्मक में तब्दील कीजिए, जीवन सुखमय बनेगा। हमें शक्तिशाली होना पसंद है, कमजोर और कायर होना नहीं। इसीलिए परमात्मा से प्रार्थना है - इतनी शक्ति हमें देना दाता।
जीवन में संगत का असर - संतों की संगत से रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बने
ब्रह्माकुमारी दीदी ने कहा कि जीवन में संगत का बहुत बड़ा असर दिखाई देता है। जैसी संगत वैसी रंगत। इसका सबसे बड़ा उदाहरण महर्षि वाल्मीकि हैं। पहले वे रत्नाकर नाम के डाकू थे। संतों की टोली की संगत में आते ही उनका जीवन बदल गया और वही रत्नाकर तपस्या करके महर्षि वाल्मीकि बन गए, जिन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की।
अंत में दीदी ने मीडियाकर्मियों से सकारात्मक पत्रकारिता का आह्वान किया, जिससे समाज में शांति, प्रेम और भाईचारा बढ़े।
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