नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। फैशन और तकनीक के बदलते दौर में स्मार्ट टेक्सटाइल्स एवं पहनने योग्य तकनीक (वियरेबल टेक्नोलॉजी) तेजी से उभरते क्षेत्र बन रहे हैं। इसी दिशा में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी बदलावों से परिचित कराने के उद्देश्य से नंदलाल बोस सुभारती कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स एंड फैशन डिजाइन, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के फैशन एवं टेक्सटाइल डिजाइन विभाग की ओर से अमृता शेरगिल कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘स्मार्ट टेक्सटाइल्स एवं वियरेबल टेक्नोलॉजी’ विषय पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन सुभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.के. मित्तल एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) शल्या राज के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से किया गया। इस अवसर पर फैकल्टी ऑफ फाइन आर्ट्स के डीन एवं प्राचार्य प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का समन्वय फैशन एवं टेक्सटाइल डिजाइन विभागाध्यक्ष डॉ. नेहा सिंह ने किया।
मुख्य वक्ता डॉ. पूजा, (विषय विशेषज्ञ–गृह विज्ञान) कृषि विज्ञान केंद्र मुजफ्फरनगर, ने स्मार्ट टेक्सटाइल्स एवं वियरेबल टेक्नोलॉजी के तेजी से विकसित होते क्षेत्र पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किस प्रकार वस्त्रों और आधुनिक तकनीक के मेल से फैशन एवं टेक्सटाइल उद्योग में नए प्रयोग और संभावनाएं विकसित हो रही हैं। उन्होंने स्मार्ट टेक्सटाइल्स में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों और उनके व्यावहारिक उपयोगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसे वस्त्र स्वास्थ्य, सुरक्षा, खेल, फैशन और दैनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती तकनीक के साथ अपने कौशल को विकसित करने और नवाचार के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों को टेक्सटाइल, तकनीक, स्थिरता और वियरेबल तकनीकी समाधानों के बीच विकसित हो रहे अंतरविषयक संबंधों की जानकारी मिली। संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। प्रश्नोत्तर सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक रोचक एवं ज्ञानवर्धक बना दिया।
कार्यक्रम को विभाग की सुश्री श्रद्धा यादव, सुश्री अनिशा आनंद, डॉ. सुरभि दास, सुश्री देवसुनी एवं सुश्री अभिलाषा गर्ग का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुरभि दास ने किया।
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