नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग द्वारा आज अंतरराष्ट्रीय सर्पदंश जागरूकता दिवस के अवसर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम एवं विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सर्पदंश से बचाव, समय पर उपचार और इससे जुड़ी भ्रांतियों को लेकर आमजन और मरीजों को जागरूक करना था। मेडिसिन ओपीडी में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. संध्या गौतम, डॉ. स्नेहलता वर्मा और डॉ. विवेक कुमार ने मरीजों एवं उनके परिजनों को सर्पदंश के बाद अपनाए जाने वाले प्राथमिक उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
चिकित्सकों ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में मरीज को शांत रखना, प्रभावित अंग को स्थिर रखना और बिना देरी के नजदीकी चिकित्सा केंद्र पहुंचाना सबसे जरूरी है। साथ ही उन्होंने झाड़-फूंक, चीरा लगाने, जहर चूसने जैसे पारंपरिक और नुकसानदायक तरीकों से बचने की सलाह दी।
इसके बाद मेडिसिन विभाग में "सर्पदंश एवं उसका आधुनिक प्रबंधन" विषय पर विशेष सेमिनार और प्रेजेंटेशन आयोजित किया गया। सेमिनार में डॉ. प्रदीप ने विषैले और गैर-विषैले सांपों की पहचान, सर्पदंश के नैदानिक प्रभाव, एंटी स्नेक वेनम के उपयोग और गंभीर मामलों के प्रबंधन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने किया। इस अवसर पर डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. योगिता सिंह, डॉ. संध्या गौतम, डॉ. श्वेता, डॉ. स्नेहलता वर्मा, डॉ. रचना सेमवाल सहित मेडिसिन विभाग के सभी रेजीडेंट डॉक्टर मौजूद रहे।
चिकित्सकों ने कहा कि सर्पदंश एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, लेकिन समय पर अस्पताल पहुंचने और सही उपचार से जटिलताओं और मृत्यु के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा - सर्पदंश के बाद घबराएं नहीं, मरीज को शीघ्र और सुरक्षित रूप से अस्पताल पहुंचाएं।
इस सफल आयोजन के लिए मेडिकल कॉलेज मेरठ के प्राचार्य डॉ. आर. सी. गुप्ता ने मेडिसिन विभाग को शुभकामनाएं दीं।
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