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Saturday, September 19, 2026

‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत अजराड़ा में कार्यक्रम आयोजित


संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों को लेकर वक्ताओं ने रखे विचार

इकराम चौधरी
नित्य संदेश, मेरठ। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत शनिवार को जामिया इस्लामिया अरबिया गुलज़ारे-ए-हुसैनिया, अजराड़ा, मेरठ में महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, समानता, महिलाओं के अधिकारों, मुस्लिम पर्सनल लॉ तथा देश में आपसी भाईचारे को मजबूत करने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ताओं ने विस्तार से अपने विचार रखे।

कार्यक्रम का आगाज़ कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुआ। इसके बाद जामिया गुलज़ारे-ए-हुसैनिया, अजराड़ा के मोहतमिम मौलाना डॉ. अब्दुल मालिक मुग़ीसी ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में भाईचारा, आपसी सम्मान, इंसाफ और शांतिपूर्ण वातावरण को मजबूत करना समय की महत्वपूर्ण जरूरत है।

उन्होंने कहा कि संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। इसलिए नागरिकों को संवैधानिक व्यवस्था की जानकारी हासिल करने के साथ-साथ अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। उन्होंने सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और लोगों को शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जामिया गुलज़ारे-ए-हुसैनिया के तर्जुमान मौलाना आस मोहम्मद गुलज़ार क़ासमी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने सामाजिक परिस्थितियों और नागरिक अधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखते हुए कहा कि देश के सभी वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा और आपसी सौहार्द बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की जानकारी हासिल करने तथा किसी भी समस्या के समाधान के लिए शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक रास्ता अपनाने की अपील की।

इसके बाद मौलाना सैयद अकील क़ासमी ने धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक समानता और नागरिक अधिकारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता से है। देश में अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों को मानने वाले लोग रहते हैं और इस विविधता के बीच आपसी सम्मान तथा भाईचारे की भावना को मजबूत किया जाना जरूरी है।

कार्यक्रम में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महिला विभाग की संयोजक जलीसा सुल्ताना यासीन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, सामाजिक सुधार, पारिवारिक मामलों और संवैधानिक संरक्षण से जुड़े विषयों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होना चाहिए तथा परिवार और समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान मिलना जरूरी है।

वहीं कुद्दूसा सुल्ताना मेहमान-ए-एजाज़ी के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं को तलाक से जुड़े मामलों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने धार्मिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में महिलाएं पारिवारिक परिस्थितियों, तलाक या वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में अपने अधिकारों को समझ नहीं पातीं। ऐसे में महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है।

कुद्दूसा सुल्ताना ने कहा कि वैवाहिक जीवन में किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न होने पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय परिवार के जिम्मेदार लोगों और जानकार व्यक्तियों के माध्यम से बातचीत एवं समझौते की कोशिश की जानी चाहिए। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और तलाक से संबंधित धार्मिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं की सही जानकारी हासिल करें, ताकि किसी भी परिस्थिति में वे भ्रम या गलत जानकारी का शिकार न हों।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को अपने बच्चों, परिवार और समाज के भविष्य को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण पारिवारिक निर्णयों को समझदारी और जागरूकता के साथ लेना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के साथ-साथ परिवारों में संवाद, सम्मान और आपसी समझ को बढ़ावा देने की अपील की।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ’ अभियान का उद्देश्य लोगों को संविधान में दिए गए अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों की जानकारी होने के साथ-साथ संविधान में निर्धारित कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए।

इस दौरान धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, मानव गरिमा, समानता और देश में भाईचारे का वातावरण मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारत विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों वाला देश है। देश की इस विविधता और आपसी सौहार्द को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा तथा उनके साथ न्याय सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि देश की तरक्की का वास्तविक लाभ तभी माना जा सकता है, जब समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान, अवसर और अपने अधिकारों का संरक्षण मिले।

इस दौरान गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं, महिलाओं के खिलाफ अपराध और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विकास और आर्थिक प्रगति के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकारों और सम्मान की रक्षा भी जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक मामलों में समुदाय की भावनाओं तथा संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए संवाद और चर्चा का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से किसी भी विषय पर जानकारी के लिए विश्वसनीय एवं जानकार स्रोतों से मार्गदर्शन लेने की अपील की।

महिलाओं की भागीदारी और उनकी जागरूकता को भी कार्यक्रम में विशेष महत्व दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि परिवार और समाज की मजबूती में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए महिलाओं को शिक्षा, अधिकारों, पारिवारिक कानूनों और सामाजिक मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाना जरूरी है।

कार्यक्रम के अंत में जामिया गुलज़ारे-ए-हुसैनिया, अजराड़ा के मोहतमिम मौलाना डॉ. अब्दुल मालिक मुग़ीसी ने दूर-दराज से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे सभी मेहमानों, वक्ताओं और उपस्थित लोगों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी और सहयोग से ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। उन्होंने सभी मेहमानों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया।

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