नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। विक्टोरिया गार्डन, मेरठ के 11-जी स्थित निज निवास पर चल रही सामवेद की दशमी कथा के तीसरे दिन कथाव्यास पारुल मित्तल ने सामवेद के नवम प्रपाठक में वर्णित इन्द्र और सोम की कथा का वाचन किया।
कथाव्यास ने बताया कि राजा इन्द्र शक्ति, नेतृत्व, संरक्षण और विजय के प्रतीक हैं। मनुष्य इन्द्र से धन की प्रार्थना करता है। आज के परिप्रेक्ष्य में चार बातें महत्वपूर्ण हैं -
- धन का स्रोत सही हो,
- विवेक से सदुपयोग हो,
- दूसरों की सहायता की भावना हो,
- ईश्वर को केवल धनदाता नहीं, मार्गदर्शक मानना चाहिए।
उन्होंने भेड़ और भेड़िये के रूपक से समझाया कि जब भय का भेड़िया डराए, तो विश्वास और साहस की शक्ति से काम लेना चाहिए। सोम के विषय में बताया कि सोम ऊर्जा और प्रसन्नता प्रदान करने वाला तत्व है। जैसे सोम शुद्ध होता है, वैसे ही ईश्वर की उपासना में भी शुद्ध भाव होना चाहिए। सोम केवल यज्ञीय पेय नहीं, बल्कि मेधा और बुद्धि को बढ़ाने वाला है। वायु प्राण और गति का प्रतीक है। कथाव्यास ने कहा कि मंत्र हमारे विचारों को शुद्ध करें, ज्ञान-विवेक और ऊर्जा दें तथा श्रेष्ठ लक्ष्यों की ओर बढ़ाएं। कथा के दौरान उन्होंने भक्तिगीतों का मधुर गान भी किया।
कथा में पाठ किए गए मंत्र -
यदिन्द्राहं यथा नु त्वमीशीय वस्व एक इत्।
स्तोता मे गो सखा स्यान्मे गो सखा स्यात्॥14॥
शिक्षेयमस्मै दित्सेयं शचीपते मनीषिणे।
यदहं गोपतिः स्यां सुदयालुः॥15॥
धेनुष्ट इन्द्र सुनृता यजमानाय सुन्वते।
गामश्वं पिष्युषी दुहे पुरुवसुम्॥16॥
आपो हि ष्ठा मयो भुवस्ता न ऊर्जे दधातन।
महे रणाय चक्षसे प्रशस्तये॥17॥

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