नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। महावीर विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा, साहित्य एवं भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को समर्पित एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रख्यात लेखिका एवं कवयित्री कोमल रस्तोगी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय परिवार की ओर से विशिष्ट अतिथि कोमल रस्तोगी जी का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। उनके विश्वविद्यालय आगमन ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की। विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उनका उत्साहपूर्वक स्वागत किया। अपने संबोधन में कोमल रस्तोगी जी ने हिंदी भाषा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और भारतीय संस्कृति में उसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को हिंदी से आत्मीय रूप से जुड़ने का संदेश दिया। उन्होंने अपने भावपूर्ण एवं प्रभावशाली कविता-पाठ के माध्यम से हिंदी, भारतीय संस्कृति, साहित्य और भारतीय अस्मिता के प्रति प्रेम एवं गौरव की भावना जागृत की। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संवेदना, विचार और पहचान की वाहक होती है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे हिंदी के साहित्य को पढ़ें, अपनी भाषा पर गर्व करें और इसकी समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।
इस अवसर पर महावीर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सर्वोत्तम दीक्षित ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की शक्ति हमारी भाषाई विविधता में निहित है। भारत में अनेक भाषाओं को सम्मान दिया जाता है और यही विविधता हमारी वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि हिंदी इस विविधता को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी भाषा एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों के लिए पोस्टर प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए हिंदी भाषा, साहित्य एवं भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान वंशिका, द्वितीय स्थान जतिन तथा तृतीय स्थान हिमानी ने प्राप्त किया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव, आत्मीयता एवं सम्मान का वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के साथ-साथ उसे भावी पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रेरणा दी।

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