-विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत कारीगरों को प्रशिक्षण के बाद मिलेगी आधुनिक टूलकिट
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। पारंपरिक हुनर को रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से मेरठ के पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और उन्नत औजार उपलब्ध कराने की तैयारी है। योजना के तहत इस वर्ष जिले के 1500 कारीगरों को प्रशिक्षण के बाद आधुनिक टूलकिट प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र कारीगर 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
प्रदेश सरकार का जोर पारंपरिक कारीगरों के पुश्तैनी हुनर को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर है। योजना के तहत बढ़ई, नाई, कुम्हार, लोहार, सुनार, टोकरी बुनकर, राजमिस्त्री, हलवाई और मोची समेत विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को लाभ दिया जाएगा। आधुनिक औजार मिलने से कारीगर अपने काम की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के साथ बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र के उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडेय ने बताया कि योजना का लाभ ऐसे पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा, जो पहले से संबंधित व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।
10 दिन के प्रशिक्षण के बाद मिलेगी टूलकिट
चयनित कारीगरों को 10 दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें संबंधित व्यवसाय की आधुनिक तकनीक, उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, नई तकनीक अपनाने, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और उद्यमिता विकास की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद लाभार्थियों को उनके व्यवसाय के अनुरूप उन्नत टूलकिट और निर्धारित मानदेय दिया जाएगा।
पिछले साल 1250 कारीगर हुए लाभान्वित
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत मेरठ में पहले भी बड़ी संख्या में कारीगर लाभान्वित हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 1250 कारीगरों को आधुनिक टूलकिट वितरित की गई थी। पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण से भी जोड़ा गया, जिससे उन्हें स्वरोजगार शुरू करने और अपने कारोबार का विस्तार करने में सहायता मिली।
31 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन
इच्छुक कारीगर msme.up.gov.in पर 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए पासपोर्ट आकार का फोटो, बैंक पासबुक की छायाप्रति, आधार कार्ड, शैक्षिक योग्यता प्रमाणपत्र तथा एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आवेदकों के लिए जाति प्रमाणपत्र आवश्यक होगा। आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। संबंधित विधा से जुड़े होने का प्रमाण ग्राम प्रधान या वार्ड पार्षद से प्रमाणित होना भी जरूरी है।
इन्होंने कहा
उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडेय ने बताया कि योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने पात्र कारीगरों से अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय से आवेदन करने की अपील की।

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