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Wednesday, August 19, 2026

शास्त्रीय संगीत की सुरमयी साधना से गूंजा सुभारती विश्वविद्यालय



पंडित सत्यशील देशपांडे ने विद्यार्थियों को सिखाईं राग और बंदिशों की बारीकियां

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के संगीत एवं ललित कला संकाय के मंच कला विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय शास्त्रीय संगीत कार्यशाला में विद्यार्थियों को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा, रागों की बारीकियों और बंदिशों की विविधता का गहन प्रशिक्षण मिला। 17 और 18 अगस्त 2026 को पंडित बिरजू महाराज सभागार में आयोजित कार्यशाला में ग्वालियर घराने के प्रख्यात संगीत मनीषी एवं मूर्धन्य कलाकार पंडित सत्यशील देशपांडे ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।


कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल, उपकुलपति मुनिश रेड्डी, ललित कला संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर गायन विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना की मनोहारी प्रस्तुति दी। सभी गणमान्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं पटका पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में मंच कला विभाग के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य विषय ‘रागों में बंदिशों की विविधता एवं सुंदरता’ रहा। पंडित सत्यशील देशपांडे ने विद्यार्थियों को राग तोड़ी की विभिन्न बंदिशों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से परिचित कराया। उन्होंने ‘अब मोरे राम...’, ‘जा जा रे जा...’, ‘तुम संग लागी रटना मोरी...’ सहित ‘नाद्रीद्री तुम तनन तन देरेना...’ तराना प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों को तीन ताल में विभिन्न बंदिशों तथा एकताल में तराना सीखने का अवसर मिला। उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों ने राग, बंदिश और ताल की बारीकियों को व्यावहारिक रूप से समझा। कुलपति प्रो. (डॉ.) विनय कुमार मित्तल ने अपने आशीर्वचन में कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे विद्वान एवं महान कलाकार का आगमन और विद्यार्थियों को उन्हें प्रत्यक्ष सुनने तथा उनसे सीखने का अवसर मिलना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने के साथ उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


कार्यशाला के समापन अवसर पर “सत्यजीत रे सभागार” में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इसमें संगीत मनीषी पंडित सत्यशील देशपांडे ने अपनी सुमधुर गायन प्रस्तुति से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने राग मधुवंती से सांस्कृतिक संध्या का आगाज किया। इसके बाद राग पुरिया धनाश्री और दरबारी कन्हड़ा की बंदिशों ने पूरे सभागार को सुरों से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में राग भैरवी में पंडित सत्यशील देशपांडे ने बेगम अख्तर की अमर गजल ‘ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया’ प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, संत कबीर दास के निर्गुण भक्ति पद से सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ। भक्ति और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत इस प्रस्तुति ने श्रोताओं को गहरी शांति और आत्मिक अनुभूति प्रदान की।


ललित कला संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा ने कहा कि शास्त्रीय संगीत केवल कला की विधा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की अभिव्यक्ति भी है। ऐसी कार्यशालाओं से विद्यार्थियों को मंचीय अनुभव के साथ संगीत की गहराइयों को समझने का अवसर मिलता है। अंत में विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना ग्रोवर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही कहा की कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को शास्त्रीय संगीत की पारंपरिक विधाओं से जोड़ते हुए राग, बंदिश और ताल का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है। पंडित सत्यशील देशपांडे जैसे वरिष्ठ कलाकार का मार्गदर्शन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी है।


कार्यशाला एवं सांस्कृतिक संध्या का मंच संचालन डॉ. रक्षा सिंह डेविड ने किया। आयोजन को सफल बनाने में मंच कला विभाग के डॉ. दीपक सिंह, डॉ. श्वेता चौधरी, डॉ. अमृता जोशी, श्वेता सिंह, निशी चौहान, डॉ. प्रियंका, अभिषेक मिश्रा, फरदीन हुसैन एवं मेहराज़ खान एवं अक्षय शर्मा का विशेष सहयोग रहा।

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