Breaking

Your Ads Here

Wednesday, August 26, 2026

टीबी के खिलाफ सुभारती में जागरूकता की अलख, विद्यार्थियों को बताए बचाव और उपचार के उपाय

 


समय पर जांच और पूरा उपचार ही टीबी से मुक्ति की कुंजी : विशेषज्ञ

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। टीबी (तपेदिक) के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और लोगों को समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के शिक्षा विभाग की ओर से टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता एवं संवेदीकरण सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को टीबी के लक्षण, बचाव, जांच, उपचार और स्वस्थ जीवन शैली के महत्व की जानकारी दी गई।


कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। डीन, फाइन आर्ट एवं शिक्षा संकाय, प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा ने अतिथियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि “अच्छा स्वास्थ्य ही प्रत्येक सफलता का आधार है।” उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य एवं जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थी स्वयं जागरूक होने के साथ समाज को भी जागरूक कर सकें। डॉ. अनोज राज, विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टीबी के प्रति जागरूकता, इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे टीबी से जुड़ी सही जानकारी स्वयं प्राप्त करें और उसे अपने परिवार एवं समाज तक पहुंचाएं।


कार्यक्रम की विशेषज्ञ वक्ता डॉ. अदिति वत्स, एमबीबीएस इंटर्न, सुभारती मेडिकल कॉलेज ने टीबी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सरल एवं सहज भाषा में साझा कीं। उन्होंने बताया कि लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय परामर्श और जांच कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उचित उपचार मिलने पर टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है।


डॉ. अदिति वत्स ने उपचार के दौरान दवाओं का निर्धारित कोर्स पूरा करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सक की सलाह के बिना दवा की एक भी खुराक बंद नहीं करनी चाहिए और न ही उपचार को बीच में छोड़ना चाहिए। उन्होंने रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के लिए पौष्टिक आहार, योग और नियमित व्यायाम को जीवनशैली में शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि टीबी से पीड़ित व्यक्ति को दवाओं के साथ परिवार का सहयोग, प्रेम और देखभाल भी मिलनी चाहिए। संतुलित आहार, स्वस्थ जीवन शैली और नियमित दवा से उपचार को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा मरीज के पूर्ण स्वस्थ होने की संभावना बढ़ती है।


कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने टीबी के लक्षण, जांच, उपचार, दवाओं और बचाव से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। डॉ. अदिति वत्स ने सभी प्रश्नों का सरल एवं संतोषजनक उत्तर देते हुए प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. (डॉ.) इंदिरा सिंह, अकादमिक समन्वयक, शिक्षा विभाग, शिक्षा संकाय ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक, उपयोगी और जनहितकारी बताते हुए इसकी सराहना की। कार्यक्रम डॉ. रीबा  एवं डॉ. रूपम जैन के निर्देशन में किया गया और संचालन बी.एड. प्रथम वर्ष की छात्राओं वैष्णवी मिश्रा एवं काजल ने किया। वहीं मीडिया कवरेज का दायित्व संगीता, नमन एवं उनकी टीम ने प्रभावी ढंग से निभाया।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here