नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस एवं जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल के संयुक्त तत्वावधान में विधि संकाय के मूट कोर्ट में “From Awareness to Action: The Role of Youth in Promoting Gender Equality and an Inclusive Campus” विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को लैंगिक समानता, समावेशिता, पारस्परिक सम्मान और संवेदनशीलता के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें सुरक्षित, निष्पक्ष एवं गरिमापूर्ण शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, शोधार्थियों तथा छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. नीरू सिंह, कार्यक्रम समन्वयक एवं नोडल अधिकारी, केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि किसी भी समाज और शिक्षण संस्थान की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और गरिमा मिले। उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता केवल चर्चा या जागरूकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे दैनिक व्यवहार और कार्यशैली का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
विशेष अतिथि वक्ता डॉ. राखी कुमारी झा ने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और समावेशी परिसर के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि समावेशी परिसर वह है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी बिना किसी भय, संकोच या भेदभाव के अपनी बात रख सके और अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ सके। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘जेंडर चैंपियन’ बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि किसी भी अनुचित व्यवहार या भेदभाव को देखकर मौन रहना उचित नहीं है। युवाओं को जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच के साथ ऐसे मामलों के प्रति आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म और संचार माध्यमों के रचनात्मक उपयोग के माध्यम से समानता, सुरक्षा और सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संदेश समाज तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) रविंद्र कुमार जैन, डीन, केरल वर्मा सुभारती कॉलेज ऑफ साइंस ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को लैंगिक भेदभाव से मुक्त, सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अकादमिक उत्कृष्टता और नवाचार का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब प्रत्येक विद्यार्थी को समान अवसर और आगे बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण मिले। डॉ. सारिका अभय, प्रभारी, जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल ने सेल की ओर से संचालित विभिन्न गतिविधियों तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सहयोग तंत्र की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्पीड़न और भेदभाव पूर्ण व्यवहार की रोकथाम के लिए जागरूकता के साथ संस्थागत सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने सुरक्षित एवं समावेशी परिसर के निर्माण में प्रत्येक सदस्य की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के बाद आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने लैंगिक रूढ़िवादिता, समानता, सुरक्षा और समावेशिता से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर अतिथि वक्ता के साथ खुलकर संवाद किया। चर्चा ने विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारियों पर विचार करने तथा लैंगिक संवेदनशीलता को व्यवहार में उतारने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के समापन पर अतिथि वक्ता, गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। यह व्याख्यान विद्यार्थियों में लैंगिक समानता, सम्मान, गरिमा और समावेशिता की भावना को मजबूत करने तथा उन्हें जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

.jpeg)

No comments:
Post a Comment