समानता की भावना को समाज तक पहुंचाना है उद्देश्य : डॉ. अतुल कृष्ण
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सामाजिक समरसता, समानता, पारिवारिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत सनातन संगम न्यास एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘मधु-हर सम्मान’ समारोह का भव्य आयोजन 27 अगस्त 2026 को स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में किया जाएगा। समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (औद्योगिक विकास एवं संसदीय कार्य) श्री जसवंत सिंह सैनी जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
‘मधु-हर सम्मान’ के लिए ऐसे दंपतियों से नामांकन आमंत्रित किए गए हैं, जिन्होंने अपने पुत्र या पुत्री का सवर्ण एवं अनुसूचित वर्ग के बीच अंतर्जातीय विवाह कराकर सामाजिक एकता, पारिवारिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा दिया है। इस पहल को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में उत्साह देखने को मिला है और बड़ी संख्या में नामांकन प्राप्त हुए हैं।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी, समाजसेवक एवं सनातन संगम न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना समरसता, समानता और सभी के सम्मान में निहित है। समाज में जातिगत भेदभाव और रूढ़ियों से ऊपर उठकर परिवारों को जोड़ने वाले लोगों को सम्मानित करना केवल उनका अभिनंदन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सामने एक सकारात्मक आदर्श प्रस्तुत करना है।
डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि “मधु-हर सम्मान उन परिवारों को सम्मान देने का प्रयास है, जिन्होंने सामाजिक दबाव और रूढ़ियों से ऊपर उठकर प्रेम, समानता और मानवीय गरिमा को प्राथमिकता दी। ऐसे परिवार समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। हमारा उद्देश्य किसी वर्ग के विरुद्ध खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी वर्गों के बीच सम्मान, आत्मीयता और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है। जब परिवार जुड़ेंगे, तभी समाज मजबूत होगा और जब समाज मजबूत होगा, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा।”
‘मधु-हर सम्मान’ का आधार भारतीय इतिहास की एक प्रेरक घटना है। वर्ष 1156 में कर्नाटक के कल्याण राज्य में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देने के लिए ब्राह्मण वर्ण के मधुवरस और मोची समाज के हरलय्या ने अपने बच्चों का ऐतिहासिक अंतर्जातीय विवाह कराया था। सामाजिक रूढ़ियों और कट्टर विरोध के बावजूद दोनों समाज सुधारकों ने समानता के लिए संघर्ष किया और अपने प्राणों का बलिदान दिया।
इन्हीं अमर समाज सुधारकों की स्मृति और उनके सामाजिक समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘मधु-हर सम्मान’ की शुरुआत की गई है। यह सम्मान उन परिवारों को सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में पहचान देने का प्रयास है, जो जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर रिश्तों को मानवीय मूल्यों और समानता के आधार पर स्वीकार करते हैं।
सनातन संगम न्यास, मेरठ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव ने कहा कि अंतर्जातीय विवाह को केवल विवाह के रूप में नहीं, बल्कि दो परिवारों और सामाजिक समूहों को जोड़ने वाले सेतु के रूप में देखा जाना चाहिए। जो माता-पिता सामाजिक रूढ़ियों से ऊपर उठकर अपने बच्चों के निर्णय का सम्मान करते हैं और दोनों परिवारों के बीच आत्मीय संबंध स्थापित करते हैं, वे वास्तव में सामाजिक परिवर्तन की नींव मजबूत करते हैं। ‘मधु-हर सम्मान’ ऐसे ही प्रेरणादायी परिवारों को समाज के सामने सम्मानित करने और नई पीढ़ी को समानता एवं समरसता का संदेश देने की पहल है। डॉ. राघव ने यह भी कहा की इस अभियान का उद्देश्य समाज में किसी प्रकार का विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि सभी वर्गों के बीच सम्मान, संवाद और भाईचारे की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इस सकारात्मक सामाजिक अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
सनातन संगम न्यास के संयोजक अनिल अज्ञात, सेक्रेटरी मनीष पाठक, कोषाध्यक्ष पराग गुप्ता एवं प्रभारी विवेक सोम ने समाज के सभी वर्गों से ‘मधु-हर सम्मान’ एवं जन-जागरूकता अभियान से जुड़ने का आह्वान किया हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 27 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाला ‘मधु-हर सम्मान’ समारोह सामाजिक समरसता की दिशा में एक नई मिसाल कायम करेगा और समाज में समानता, सामाजिक सौहार्द तथा राष्ट्रीय एकता के संदेश को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।
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