नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत अग्रवाल शारदा ने शुक्रवार को जनपद में जगह-जगह लगे कांवड़ सेवा शिविरों में पहुंचकर शिवभक्त कांवड़ियों की सेवा की और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया।
श्री शारदा ने हापुड़ अड्डा स्थित भगत सिंह मार्केट व्यापार संघ के कांवड़ सेवा शिविर, बेगमपुल में नितिन बालाजी के कांवड़ सेवा शिविर, मोदीपुरम-पल्लवपुरम में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील भराला के कांवड़ सेवा शिविर तथा वैश्य समाज मोदीपुरम-पल्लवपुरम के कांवड़ सेवा शिविर सहित अनेक शिविरों में जाकर कांवड़ियों को जलपान, भोजन वितरित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था, तपस्या, श्रद्धा और भगवान शिव के प्रति अटूट समर्पण का विराट स्वरूप है।विनीत शारदा ने कहा, "2017 से पहले समाजवादी पार्टी की सरकार में कांवड़ियों के साथ जिस प्रकार का दुर्व्यवहार होता था और सनातन धर्म की आस्था को जिस तरह अपमानित किया जाता था, वह उत्तर प्रदेश की जनता भूली नहीं है। लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कांवड़ियों का जिस प्रकार स्वागत, सम्मान और सत्कार हो रहा है, वह बताता है कि सरकार की सोच में कितना बड़ा परिवर्तन आया है।" उन्होंने कहा कि यह केवल कांवड़ यात्रा की व्यवस्था बदलने की बात नहीं है, बल्कि यह सनातन की आस्था को शासन के स्तर पर मिला सम्मान है। आज कांवड़िया निडर होकर हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए मां गंगा का पवित्र जल लेकर अपने भोलेनाथ के धाम की ओर बढ़ रहा है और पूरा उत्तर प्रदेश शिवमय दिखाई दे रहा है।
श्री शारदा ने कहा कि भगवान श्रीराम हमारी मर्यादा हैं, भगवान श्रीकृष्ण हमारी धर्मनीति हैं और भगवान शिव हमारी आस्था, तपस्या और त्याग के प्रतीक हैं। मां गंगा सनातन संस्कृति की जीवनधारा है, इसलिए सनातन की आस्था का सम्मान करना भारत की आत्मा का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में जगह-जगह लग रहे कांवड़ सेवा शिविर सेवा, समर्पण और सनातन संस्कारों की जीवंत मिसाल हैं। कांवड़ियों को भोजन, जल, चिकित्सा और विश्राम उपलब्ध कराना केवल सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ की सेवा है। शारदा ने सभी कांवड़ सेवा शिविरों के आयोजकों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और सेवाभावियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हर-हर महादेव का यह उद्घोष केवल शिवभक्ति का जयघोष नहीं, बल्कि सनातन की जागृत शक्ति का उद्घोष है।

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