नित्य संदेश ब्यूरो
ललितपुर। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय ललितपुर में प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. मयंक कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया गया। इस वर्ष 2026 की थीम "हेपेटाइटिस : इसे खत्म करने के लिए बाधायें हटायें" रही, जिसका उद्देश्य बाधायें दूर कर लोगों और जीवन बचाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं - टीकाकरण, जांच एवं इलाज के बीच आने वाली वित्तीय और सामाजिक रुकावटों को हटाना है।
कार्यक्रम में मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विनय सोनी ने बताया कि हेपेटाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें लीवर में सूजन आ जाती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, वायरल हेपेटाइटिस पैदा करने वाले पांच मुख्य प्रकार के वायरस हैं - हेपेटाइटिस A, B, C, D, E। वर्तमान में पूरे देश में लगभग 03 करोड़ लोग हेपेटाइटिस B से संक्रमण से ग्रसित हैं, जबकि 1.4 करोड़ व्यक्ति हेपेटाइटिस C से संक्रमित हैं। उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस B और C का उपचार एवं नई दवाइयां उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से संक्रमित व्यक्ति का सही तरीके से उपचार संभव है।
वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. पवन सूद ने जानकारी दी कि हेपेटाइटिस-C को काला पीलिया कहते हैं। हेपेटाइटिस-A और B को टीकाकरण के माध्यम से प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। हेपेटाइटिस-B का टीका अप्रत्यक्ष रूप से हेपेटाइटिस-D से भी सुरक्षा प्रदान करता है, जो केवल उन लोगों में होता है जो पहले से ही हेपेटाइटिस-B से संक्रमित हैं। ये टीके सुरक्षित हैं, व्यापक रूप से उपलब्ध हैं एवं सभी शिशुओं, स्वास्थ्य कर्मियों एवं उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए अनुशंसित हैं।
प्रधानाचार्य प्रोफेसर डॉ. मयंक कुमार शुक्ला ने बताया कि हेपेटाइटिस-B का टीका जन्म के तुरंत बाद शुरू होकर बच्चों, किशोरों और वयस्कों को भी लगाया जा सकता है। यह टीका मुख्यतः जन्म के समय - 24 घंटे के भीतर, बचपन के अन्य टीकों के साथ 6, 10 और 14 सप्ताह में और स्वास्थ्य जोखिमों के आधार पर 59 वर्ष तक के वयस्कों को भी दिया जाता है।
इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य डॉ. श्रुति सिंह, सह आचार्य डॉ. महेश कुमार नवदया, सहायक आचार्य माइक्रोबायोलॉजी विभाग डॉ. पूजा गुप्ता, सहायक आचार्य पैथोलॉजी डॉ. संध्या साख्या, सहायक आचार्य पैथोलॉजी डॉ. रवि कान्त, हॉस्पिटल क्वालिटी मैनेजर नंदलाल यादव, हेल्प डेस्क मैनेजर महेन्द्र पटेल एवं अन्य स्टाफ मौजूद रहा।
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