
नित्य संदेश, इंदौर। डेढ़ घंटे का समय... 29 लघु नाटिकाएं... 20 कलाकार और दर्शक मंत्रमुग्ध। यह कमाल हुआ आज शाम प्रीतम लाल दुआ सभागृह में। अवसर था साहित्य और रंगकर्म के सुन्दर समन्वय को समर्पित संस्था "क्षितिज साहित्य संस्था" के तत्वावधान में आयोजित लघुकथा नाट्य 2026 में। "पथिक" इंदौर ( नाट्य एवं सांस्कृतिक कला मंच) के बीस कलाकारों ने मंच पर कुछ ही मिनटों में खत्म होने वाली एक के बाद एक उनतीस नाटिकाएं खेलीं।

ये नाटिकाएं देशभर के लब्ध प्रतिष्ठित लघुकथाकारों जिनमें सूर्यकांत नागर, सतीश राठी, दीपक गिरकर, सुरेश रायकवार, बी. एल.आच्छा, बलराम अग्रवाल, डॉ पुरुषोत्तम दुबे, योगेन्द्र नाथ शुक्ल, सुकेश साहनी, ब्रजेश कानूनगो, ज्योति जैन, अंतरा करवड़े , डॉ. वसुधा गाडगिल, सीमा व्यास, रश्मि चौधरी, रश्मि स्थापक, डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्रा, कान्ता राय, सुषमा शर्मा, विनीता शर्मा, संतोष सुपेकर, राममूरत राही, कनक हरलालका, विजय सिंह चौहान, नितिन उपाध्ये, जीतेन्द्र गुप्ता, अदिति सिंह भदौरिया, पवन शर्मा और विद्यावती पाराशर जैसे लघुकथा कारों की कथाओं पर आधारित थीं।

चूँकि लघुकथा अपने आप में परिपूर्ण होती हैं, इसलिए सारी नाटिकाएं भी अपने आप में पूर्णता लिए हुए थीं। लघुकथा में परस्पर व्यवहार और सोच में जो विरोधाभास होता है, साथ ही उनमें जो संवेदनशीलता होती है, वह कलाकारों ने पूरी शिद्दत से मंच पर अपने सशक्त अभिनय से बखूबी प्रस्तुत की।
इनके कथानक राष्ट्रीय पारिवारिक, दोस्ती और व्यवस्था से लेकर देश दुनिया के तमाम अंतर्विरोधों तक फैले हुए थे। ये नाटिकाएँ नंदकिशोर बर्वे के कुशल निर्देशन और सतीश श्रोत्री के मार्गदर्शन में खेली गईं।



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