नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल एवं प्रो.अरुण कुमार द्वारा डिजिटल सोशलाइजेशन स्केल का विकास एवं मानकीकरण किया गया है। यह द्विभाषी (हिन्दी एवं अंग्रेज़ी) दोनों भाषायों में विकसित किया गया है वर्तमान डिजिटल युग में विद्यार्थियों के सामाजिक व्यवहार, ऑनलाइन सहभागिता, डिजिटल नैतिकता तथा उत्तरदायी डिजिटल नागरिकता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह स्केल स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए विकसित किया गया है तथा इसके मानकीकरण की प्रक्रिया वैज्ञानिक मनोमितीय सिद्धांतों के अनुरूप संपन्न की गई है, जिससे इसकी विश्वसनीयता एवं वैधता सुनिश्चित हुई है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह गोयल ने बताया कि आज शिक्षा, संचार एवं सामाजिक संपर्क का स्वरूप तेजी से डिजिटल माध्यमों की ओर अग्रसर हो रहा है। ऐसे परिवेश में केवल तकनीकी दक्षता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर जिम्मेदार, नैतिक, समावेशी एवं आलोचनात्मक सामाजिक व्यवहार भी उतना ही आवश्यक है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस स्केल का निर्माण किया गया है, ताकि विद्यार्थियों के डिजिटल सामाजिक व्यवहार का समग्र एवं वस्तुनिष्ठ आकलन किया जा सके तथा शिक्षा संस्थानों को साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेप विकसित करने में सहायता मिल सके। डिजिटल सोशलाइजेशन स्केल में कुल 36 कथन सम्मिलित हैं, जिन्हें पाँच प्रमुख आयामों में विभाजित किया गया है। इनमें डिजिटल इंटरैक्शन एवं संचार दक्षता, सहयोगात्मक डिजिटल सहभागिता, डिजिटल नागरिकता एवं नैतिक उत्तरदायित्व, डिजिटल समावेशन तथा आलोचनात्मक डिजिटल जागरूकता शामिल हैं। इन आयामों के माध्यम से विद्यार्थियों की ऑनलाइन संवाद क्षमता, सहयोगात्मक कार्यशैली, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नैतिक आचरण, विविधता एवं समावेशन के प्रति दृष्टिकोण तथा डिजिटल सूचना के प्रति विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार सोच का व्यापक मूल्यांकन किया जा सकता है।
यह स्केल विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, शिक्षक-शिक्षा संस्थानों तथा शिक्षा एवं मनोविज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण शोध उपकरण सिद्ध होगा। इसके माध्यम से डिजिटल व्यवहार से संबंधित शोधों को नई दिशा मिलने के साथ-साथ विद्यार्थियों में उत्तरदायी डिजिटल नागरिकता, सुरक्षित ऑनलाइन सहभागिता तथा स्वस्थ डिजिटल संस्कृति को बढ़ावा देने में भी सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में विकसित यह स्केल भारतीय शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल सामाजिक व्यवहार के मूल्यांकन के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है और भविष्य में इस क्षेत्र में होने वाले अनुसंधानों के लिए उपयोगी आधार प्रदान करेगा।

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