गिरफ्तार करो...
भारत, लोकतांत्रिक देश है यहां संविधान और सुप्रीम कोर्ट सबसे ऊपर हैं, इसलिए किसी को भी देश की कानून-व्यवस्था को चुनौती देने का कोई हक नहीं बनता।
हमने हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के आंदोलन में उसके नेताओं और समर्थकों के बयानों को सुना भी है, जो देश को कितना शर्मिंदा करने वाले है ये किसी से नहीं छुपा है और इनसे ही देश की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
जो कुछ भी 20 जुलाई को बिना अनुमति के हिंसक संसद मार्च में सीजेपी और देश के विपक्ष के पाले गुंड़ो ने झूठा छात्रों का जामा पहनकर उपद्रव, आतंक मचाया था उसकी दिल्ली पुलिस ने आधुनिक फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस), 'क्राइम-कुंडली' सॉफ्टवेयर और डॉसियर रिकॉर्ड्स के जरिए जांच की, जिसमें 2,873 आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान हो गई है। इनमें से 2,402 लोग 'क्राइम-कुंडली' से और 471 लोग पुलिस के रिकॉर्ड से पकड़े गए है।
इन लोगों पर हत्या और हत्या के प्रयास के 163, लूट और डकैती के 284, बलात्कार और पॉक्सो समेत महिलाओं से जुड़े अपराधों के 92, शस्त्र अधिनियम के 229, नशीले पदार्थ व छीना-झपटी के 202, और अपहरण समेत अन्य गंभीर अपराधों के हजारों मामले दर्ज हैं।
इतनी बड़ी संख्या में अपराधियों का एक प्रदर्शन में शामिल होना यह स्पष्ट दिखाता है कि यह कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। बल्कि यह विपक्ष और सीजेपी जैसे संगठनों द्वारा असामाजिक तत्वों को ढाल बनाकर देश में अशांति फैलाने और भारत के हालात नेपाल या बांग्लादेश जैसे बनाने की एक बड़ी साजिश थी।
इस आंदोलन को हिंसक बनाने में सीजेपी के अभिजीत दीपके, सौरव दास और अभिषेक रांका जैसों का ही मुख्य हाथ था। पुलिस ने संसद मार्च की कोई अनुमति नहीं दी थी, फिर भी इतने अपराधियों को एकत्र करके हिंसक मार्च निकाला, जो पूरी तरह से गलत ही था। जब इस हिंसा के लिए यही लोग जिम्मेदार हैं, तो इन्हें सख्त सजा भी मिलनी ही चाहिए।
इसके साथ ही सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास का यह बयान कि "अगर सुप्रीम कोर्ट एफआईआर वाले लोगों को न छोड़ने की बात कह रहा है तो यह हमें मंजूर नहीं है," सीधे तौर पर अदालत की अवमानना है। यह दर्शाता है कि ये लोग खुद को संविधान से ऊपर समझ रहे हैं।
ये सौरभ दास, सीजेपी प्रवक्ता वैसे भी पूर्व से ही वामपंथी पत्रकार और 'क्लाइमेट एक्शन फ्रंट' का सह-संस्थापक है। ये लगातार देश-विरोधी और भारत के खिलाफ माहौल बनाने वाले एजेंडे के तहत लिखता है, जार्ज सोरोस से फंडिंग पाता है। दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद का खुला समर्थक रहा है और उसके साथ इसकी तस्वीरें भी सामने आ चुकी हैं। यह सौरभ दास, दीपके, रांका अब सुप्रीम कोर्ट को चुनौती देंगे???
ये कोई छात्रों का समर्थन नहीं कर रहे, खुद के बुलवाए गुंडों और विपक्ष के पाले उपद्रवी का समर्थन कर रहे है।
सबने देखा है दिन-रात जनता की सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों के साथ वहां दीपके से लेकर उसके समर्थक अभद्रता करते रहे, उन्हें घायल किया और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को निशाना बनाया, तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र पर हमला ही तो है।
अब उन लोगों को भी अपनी आंखें खोलनी चाहिए जो अनजाने में ऐसे आंदोलनों में इन उपद्रवियों के साथ खड़े होते हैं। जो सच्चा देशभक्त है, वह कभी भी आगे से देश को जलाने वाले उपद्रवियों के समर्थन में सीजेपी का साथ नहीं देगा।
देश में कानून का डर बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐसे षड्यंत्रकारियों पर कानून को कड़ा एक्शन लेना बेहद जरूरी है।
हमारा संविधान शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार जरूर देता है, लेकिन अपराधियों की आड़ में देश को अस्थिर करने की इजाजत नहीं देता। अंत में, हर नागरिक और संगठन को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना चाहिए, क्योंकि इस देश में कानून से ऊपर कोई नहीं है और देश से बड़ा कुछ नहीं है।
—सपना सी.पी. साहू
नित्य संदेश, समाचार संपादक


No comments:
Post a Comment