Breaking

Your Ads Here

Thursday, June 25, 2026

पवमान सोम और इन्द्र सम्बन्धी मन्त्रों की कथा कही



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। कथाव्यास प्रो. पूनम लखनपाल ने प्रो.सुधाकराचार्य त्रिपाठी की प्रेरणा से निजनिवास शास्त्रीनगर पर सामवेद की अष्टमकथा  के द्वितीय दिन सामवेद के पञ्चम एवं  षष्ठ प्रपाठक की कथा प्रारम्भ की और पवमान सोम और इन्द्र सम्बन्धी मन्त्रों की कथा कही।

ऋषि कहते हैं कि यज्ञाग्नि को दूत बनाओ, वह देवता हो कर भी मनुष्यों का साथी है। गार्हपत्य और आहवनीय दोनों रूपों में सहयोगी है। डॉ पूनम ने अग्नि के पृथ्वी पर स्थापित होने के आख्यान को भी प्रस्तुत किया। धूमशिखा अग्नि के मार्ग को कृष्णधूम से जाना जा सकता है। अग्नि श्रेष्ठ अतिथि है, जिसका प्रात:काल में स्वागत किया जाता है। वह मित्र के समान प्रिय है और हमारा मार्गदर्शक है। सोम की स्तुति करते हुए कहा कि वह दिव्य, अमृत के समान और मधुर है। वह पौष्टिक है, मानव और इन्द्रदेव का बल बढ़ाने वाला है। सोम हजारों का पोषण करने वाला, हजारों के द्वारा काम्य, विभासह और इष्टतम है। वह शुक्र के समान चमकीला, प्रजा, पृथ्वी और देवताओं के लिए सुखकारी है।

हे इन्द्र! आप हर ओर से स्तोताओं द्वारा पुकारे जाते हैं। आप हमारी मुखरित और वाणी रहित दोनों प्रकार की प्रार्थनाओं को सुनिये। आप सोमपान करने वाले,वृत्र के पुरों का नाश करने वाले, द्युलोक के स्वामी, अमित ओज वाले, समस्त कर्मों के धारणकर्ता हैं। सभी के नियन्त्रक, देवताओं के नायक हैं। डॉ पूनम ने लौकिक और व्यावहारिक उदाहरणों से आज की कथा को स्पष्ट किया।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here