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Thursday, June 25, 2026

आपातकाल ऐसा काला धब्बा है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता - कप्तान सिंह सोलंकी

नवीन मौर्य

• आपातकाल के 51 वर्ष

• आपातकाल की विभीषिका का काला अध्याय पर भाजपा द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

नित्य संदेश, इंदौर आपातकाल के 51 वर्ष पर भाजपा द्वारा शुभकारज गार्डन , पिपल्यापाला चौराहे में आपातकाल की विभीषिका का काला अध्याय विषय पर भाजपा के पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री कप्तान सिंह सोलंकी, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एम. चुबा आओ, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक गोलू शुक्ला, मालिनी गौड, मधु वर्मा, श्रवण सिंह चावड़ा, सत्यनारायण सत्तन, गोपी कृष्ण नेमा, सुदर्शन गुप्ता, पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे, बाबुसिंह रघुवंशी, ईश्वर हिंदुजा, राधेश्याम यादव, उमा नारायण पटेल, कंचन सिंह चौहान, गणेश गोयल, अजा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष भगवान परमार, लघु उद्योग निगम अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण, शांतिलाल सिंघवी की उपस्थिति में संगोष्ठी का आयोजन हुआ। 

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा जब कभी इंदौर आता हूँ तो मेरा मन प्रसन्न हो जाता है। उन्होंने कहा आपातकाल एक ऐसा काला धब्बा है, भारत के लोकतंत्र में जिसे मिटाया नहीं जा सकता। आपातकाल में लोकतंत्र की हत्या की गई, संविधान की हत्या की गयी। अपने संविधान के अंदर 3 तरह के आपातकाल को परिभाषित किया गया है , एक राष्ट्रीय आपातकाल, जब दूसरे देश के साथ जंग छिड़ जाए तो आपातकाल लगाया जाता, यह धारा 352 में आता है, दूसरा जब किसी राज्य की स्तिथि नियंत्रण से बाहर हो जाए,तब राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है यह 356 में आता है। तीसरी जब कोई देश विचित्र रूप से आर्थिक संकट में फंस जाए,  अर्थव्यवस्था छिन्न भिन्न हो जाए तब धारा 360 के अनुसार आपातकाल लगाया जा सकता है जैसे आज  पाकिस्तान में स्तिथि हो रही है। इसे आर्थिक आपातकाल कहते हैं।  

1975 में जो आपातकाल लगाया गया था वो इन तीनों श्रेणियों में आता है क्या? 

उन्होंने कहा कि व्यक्ति जब अपनी कुर्सी बचाने के लिए तानाशाह बन जाता है, न्यायालय को नहीं मानता, संविधान को नहीं मानता, भारत की आत्मा लोकतंत्र को नहीं मानता और उसका गला घोट देता है, और पूरा शासन तंत्र अपने हाथ में ले लेता है ये  वो आपातकाल है। 

जयप्रकाश नारायण ने हुंकार भारी की सिंहासन खाली करो की जनता आती है। 24 जून सुप्रीम कोर्ट का फैसला आता है, लेकिन इंदिरा ने इस्तीफा देने की जगह 25 जून को रात 12 बजे राष्ट्रपति से हस्ताक्षर करवा कर, आपातकाल लागू कर दिया, उसके बाद से सभी बड़े विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। कॉंग्रेस के नेताओं और कलेक्टर के इशारों पर लोगों को जेलों में ठूस दिया गया। जो विरोधी है सिर्फ उन्हें ही नहीं,जो कॉंग्रेस के असंतुष्ट लोग थे उन्हें भी जेलों में बंद कर दिया गया। कॉंग्रेस ने लगातार संविधान को कुचलने का काम किया। आपातकाल जैसी स्तिथि देश में फिर से नहीं होना चाहिये, संविधान की हत्या ना हो इसलिए भाजपा ने तय किया कि संविधान हत्या दिवस मनाएंगे। श्री कप्तान सिंह ने नागरिकों से आह्वान किया कि आप भी संविधान के प्रति जागरूक रहे, आपको लगे कि कोई संविधान को तोड़ रहा है, या हत्या करने का प्रयास कर रहा है तो सजग रहे। 


मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आज पार्टी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनी है, उसमे मंच पर बैठे सभी वरिष्ठ नेताओं का कठिन तप और संघर्ष है। ये भाजपा के आधार स्तम्भ है, ये नींव के पत्थर है, मैं आप सबको प्रणाम करता हूं। आपातकाल में इन सबने संघर्ष करके लोकतंत्र की रक्षा की।

आपातकाल में कई लोगो जेल में बंद कर दिया गया, कई लोगों ने जेल के बाहर रहकर आपातकाल के ख़िलाफ़ संघर्ष किया। ना दलील थी ना अपील थी, अब लोकतंत्र इतना मजबूत हो गया है कि कोई ऐसा सोच भी नहीं सकता उन्होंने कहा आपातकाल के काले अध्याय से आने वाली पीढ़ी को परिचित करवाना जरूरी है। 

नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा आज का दिन हिन्दुस्तान में संविधान की हत्या दिवस के रूप में जाना जाता है, हिंदुस्तान चांद पर पहुंच गया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब कॉंग्रेस ने हिंदुस्तान में संविधान को ताक पर रखकर लोकतंत्र का गला घोटने का काम किया था। 


श्री कप्तान सिंह सोलंकी, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक गोलू शुक्ला, पार्षद सुरेश टाकलकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर एक पेड़ माँ के अभियान के तहत मल्हार आश्रम में पौधारोपण किया। 


संचालन टोली संयोजक महेश कुकरेजा एवं आभार हरप्रीत सिंह बक्शी ने माना। 

इस अवसर पर आलोक डाबर, ओमप्रकाश फ़रकिया, सुधीर कोल्हे, महेश कुकरेजा, राकेश शर्मा, वासुदेव पाटीदार, भूपेंद्र सिंह केसरी,भारत पारख, दीपेन्द्र सिंह सोलंकी, दीप्ति हाडा, नेहा शर्मा, नारायण पालीवाल, सचिन बंसल, विशाल यादव, वरुण पाल, हेमराज वाडिया, रानू गर्ग, गोविंद पंवार, रितेश शर्मा, नितिन शर्मा, दीपांश खण्डेलवाल, राजा कोठारी, सिटू छाबड़ा  सहित अभियान टोली सदस्य उपस्थित थे।

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