नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता एवं आउटकम-बेस्ड एजुकेशन प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से "सीओ-पीओ मैपिंग एवं अटेनमेंट कैलकुलेशन" विषय पर एक उच्च स्तरीय तकनीकी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को शिक्षण परिणामों के वैज्ञानिक मूल्यांकन, डेटा विश्लेषण और शैक्षणिक गुणवत्ता आश्वासन की नवीनतम प्रक्रियाओं से अवगत कराना था।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में आचार्य विष्णु गुप्त सुभारती कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स तथा भीकाजी कामा सुभारती कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट के संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को आउटकम-बेस्ड एजुकेशन के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के एसोसिएट प्रो. (डॉ.) गौरव कुमार शर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला तथा मुख्य वक्ता का औपचारिक परिचय कराया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा प्रणाली में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए केवल पाठ्यक्रम पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों के अधिगम परिणामों का सटीक मूल्यांकन और विश्लेषण भी उतना ही आवश्यक है। कार्यशाला के मुख्य विशेषज्ञ एवं रिसोर्स पर्सन के रूप में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक श्री प्रदीप कुमार यादव उपस्थित रहे। शैक्षणिक मूल्यांकन प्रणालियों के विशेषज्ञ श्री यादव ने अपने विस्तृत तकनीकी सत्र में शिक्षकों को पाठ्यक्रम निर्माण, परिणाम-आधारित मूल्यांकन और अटेनमेंट कैलकुलेशन की जटिल प्रक्रियाओं को अत्यंत सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया। जिसमे प्रोग्राम आउटकम, प्रोग्राम स्पेसिफिक आउटकम और प्रोग्राम एजुकेशनल ऑब्जेक्टिव्स की संरचना, उनकी उपयोगिता एवं उनके बीच के अंतर को समझाया गया। साथ ही प्रत्येक विषय के लिए स्पष्ट, मापनीय और परिणामोन्मुख शिक्षण परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया पर विशेष चर्चा की गई। श्री यादव ने
पाठ्यक्रम और कार्यक्रम परिणामों के मध्य समन्वय स्थापित करने की जटिल प्रक्रिया को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया और साथ ही आंतरिक मूल्यांकन के विभिन्न मापदंडों के आधार पर छात्रों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक एवं सटीक आकलन करने की विधि बताई गई। तकनीकी सत्र के पश्चात एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित शिक्षकों ने डेटा कैलकुलेशन, लक्ष्य निर्धारण, अटेनमेंट गैप और परिणाम विश्लेषण से जुड़े अपने व्यावहारिक प्रश्नों एवं जटिलताओं को साझा किया। इस दौरान श्री प्रदीप कुमार यादव ने सभी शिक्षकों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें भविष्य में अधिक सटीकता और प्रभावशीलता के साथ अटेनमेंट कैलकुलेशन करने के व्यावहारिक उपाय बताए।
कार्यशाला का समापन अत्यंत सकारात्मक, ज्ञानवर्धक और उद्देश्यपूर्ण वातावरण में हुआ। अंत में डॉ. इंद्रनील बोस, हेड, भीकाजी कामा सुभारती कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट, ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस जटिल और तकनीकी प्रक्रिया को अत्यंत सरल एवं सहज तरीके से समझाकर मुख्य वक्ता ने शिक्षकों की समझ को और अधिक सुदृढ़ बनाया है। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक मानकों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने के लिए सभी प्रतिभागी शिक्षकों के सक्रिय सहयोग और सहभागिता की सराहना की।
यह कार्यशाला विश्वविद्यालय की गुणवत्ता-आधारित शिक्षा, सतत मूल्यांकन प्रणाली और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

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