नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आज देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था और लगातार होते पेपर लीक के विरोध में राष्ट्रव्यापी "छात्रों की गूंज" अभियान का शुभारंभ किया है। यह 40 दिनों का सघन अभियान देश के 28 प्रमुख शहरों में छात्रों, नौकरी के अभ्यर्थियों, कोचिंग हब, कॉलेज परिसरों, पुस्तकालयों और युवा समूहों के बीच चलाया जाएगा।
यह अभियान उन करोड़ों छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों की मुखर आवाज़ है जिनकी बरसों की कड़ी मेहनत बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों में देरी, नियुक्तियां अटकने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की घोर नाकामी के कारण बर्बाद हो रही है। कांग्रेस के अनुसार, छात्र सरकार से कोई अहसान नहीं मांग रहे, वे सिर्फ निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और तय समय पर पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।
NEET UG 2026 ने गहराया भरोसे का संकट
भाजपा सरकार ने NTA को जिस पारदर्शिता और सुधार के नाम पर भारत के छात्रों पर थोपा था, वह संस्था आज करोड़ों युवाओं के लिए "National Trauma Agency" बन चुकी है। देशभर में पिछले वर्षों में लगभग 89 से अधिक पेपर लीक और परीक्षा घोटाले सामने आए हैं, लेकिन आज तक किसी बड़े सरगना या उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वाले असली चेहरों का पर्दाफाश नहीं हुआ। जांच एजेंसियों ने सिर्फ छोटे दलालों और मोहरों को पकड़ा है, जबकि असली किंगपिन और उनके संरक्षक हमेशा बच निकलते हैं।
NEET UG 2026 का पेपर लीक इस सड़ चुकी व्यवस्था का सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण है, जिसमें लाखों छात्रों की मेहनत और उनके परिवारों की जीवनभर की कमाई दांव पर लगी थी। इस परीक्षा घोटाले के मानसिक तनाव के कारण देशभर में 20 से अधिक मासूम छात्रों ने आत्महत्या कर ली। कई छात्रों ने अपने सुसाइड नोट में व्यवस्था से टूटने और भविष्य के अंधकार का स्पष्ट उल्लेख किया है।
हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में स्वयं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह स्वीकार किया कि, "छात्रों की आत्महत्या के लिए मैं जिम्मेदार हूँ, यह व्यवस्था हमने ही छात्रों को दी है।" कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब शिक्षा मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है, तो वे अब तक अपने पद पर क्यों बने हुए हैं? युवाओं की मौत और पूरे देश का भरोसा टूटने के बाद भी यदि कोई मंत्री इस्तीफा नहीं दे रहा, तो जवाबदेही का अर्थ ही समाप्त हो जाता है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संवेदनशील राष्ट्रीय संकट पर संसद या बाहर एक शब्द बोलना जरूरी नहीं समझा।
पेपर लीक अब एक 'राष्ट्रीय पैटर्न'
केंद्र सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सीबीआई ने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में कथित स्रोत और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। यदि परीक्षा प्रक्रिया के अंदरूनी हिस्से से ही पेपर लीक हुआ था, तो यह बाहरी शरारत नहीं बल्कि व्यवस्था की अंदरूनी नाकामी है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में 89 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे कम से कम 6.5 करोड़ अभ्यर्थी सीधे प्रभावित हुए। इनमें से करीब 48 परीक्षाओं में री-टेस्ट कराना पड़ा और 22 परीक्षाएं आयोजित होने से पहले ही रद्द कर दी गईं। वर्ष 2019 के बाद से कम से कम 64 बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक के आरोपों से प्रभावित हुईं, जो देश के 19 राज्यों में फैली हुई थीं। इनमें 45 सरकारी भर्ती परीक्षाएं शामिल थीं और 27 परीक्षाएं पूरी तरह रद्द या स्थगित करनी पड़ीं। यह स्पष्ट करता है कि पेपर लीक अब कोई अलग-अलग घटना नहीं, बल्कि एक संगठित राष्ट्रीय नेटवर्क बन चुका है, जिसमें वेंडर एजेंसियां, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट चेन, परीक्षा केंद्र और भीतर के बिचौलिए शामिल हैं।
राहुल गांधी की कोटा रैली और 'रिजेक्शन सिस्टम'
हाल ही में राजस्थान के कोटा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महत्वपूर्ण आंकड़ों के माध्यम से साबित किया कि देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था एक "रिजेक्शन सिस्टम" बन चुकी है। इस व्यवस्था में हर 3000 छात्रों में से केवल 1 IAS बनता है, 30 IIT पहुंच पाते हैं और सिर्फ 180 डॉक्टर बन पाते हैं। बाकी करोड़ों युवाओं को यह ढांचा अवसर देने के बजाय सिर्फ अस्वीकृति देता है।
उन्होंने बताया कि जहां एक तरफ देश का कुल शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है, वहीं सिर्फ 22 लाख NEET छात्रों का निजी और कोचिंग का कुल खर्च 1.32 लाख करोड़ रुपये बैठता है। देश की टॉप-5 परीक्षाओं (SSC, UPSC, RRB, JEE, NEET) पर होने वाला कुल छात्र-व्यय भारत सरकार के शिक्षा बजट से 3 गुना अधिक है। यह व्यवस्था एक प्रकार का वसूली तंत्र बन चुकी है, जिससे निकलने वाले 1000 युवाओं में से केवल 12 बच्चों को ही औपचारिक (फॉर्मल) रोजगार मिल पाता है। इसी पीड़ा को देखते हुए राहुल गांधी ने कोटा से इस राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत की है।
इंदौर की जिम्मेदारी और मध्य प्रदेश का दर्द
मध्य प्रदेश के संदर्भ में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सूबे में व्यापमं से शुरू हुई परीक्षाओं में धांधली की यह गंभीर बीमारी भाजपा राज में अब पूरे देश में फैलकर मासूम बच्चों की जान लेने पर आमादा है। देश भर में आत्महत्या करने वाले 21 बच्चों में मध्य प्रदेश की होनहार छात्राएं आकांक्षा और अवंतिका मौर्य भी शामिल हैं।
अकेले इंदौर शहर में 25 से 30 हजार बच्चे नीट परीक्षा देते हैं, जबकि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को जोड़ लिया जाए तो यह संख्या 1 लाख से अधिक है। इंदौर की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा भी इन विद्यार्थियों पर निर्भर करता है। ऐसे में इंदौर के गणमान्य नागरिकों और प्रबुद्ध समाज की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रताड़ित हो रहे इन बच्चों के पक्ष में खड़े होकर इस भ्रष्ट सिस्टम से सीधे जवाब तलब करें। कांग्रेस ने सत्ता पक्ष पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता दिल्ली एआई समिट में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें जेल भेज दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान में भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारी दिनेश विवाल और मांगीलाल नीट पेपर लीक में कथित संलिप्तता के बावजूद आज भी सत्ताधारी दल के मंचों की शोभा बढ़ा रहे हैं।
कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें। पेपर लीक माफिया, वेंडर एजेंसियों, अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण से उनके संभावित संबंधों की निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- परीक्षा व्यवस्था का संपूर्ण ओवरहॉल: NTA की गोपनीयता, पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन, परीक्षा केंद्रों के निर्धारण, डिजिटल सिस्टम और वेंडर कॉन्ट्रैक्ट्स की बारीकी से जांच हो और हर चरण को पूर्णतः सुरक्षित बनाया जाए।
- निश्चित परीक्षा व भर्ती कैलेंडर: देश में तय वार्षिक परीक्षा और भर्ती कैलेंडर सख्ती से लागू हो। परीक्षा की तिथि, परिणाम की तिथि और नियुक्ति की समयसीमा पहले से घोषित हो और उसका अक्षरसः पालन किया जाए।
"छात्रों की गूंज" अभियान का कार्यक्रम:
- 30 जून 2026 से: देश के 28 शहरों में व्यापक पर्चा वितरण, नुक्कड़ बैठकें और छात्र संपर्क अभियान।
- जुलाई माह: साप्ताहिक विशेष कार्यक्रम, कॉलेज कैंपस संपर्क और 'अंबेडकर संवाद'।
- 1 अगस्त 2026: सभी 28 शहरों में कलेक्टरेट का घेराव व विरोध प्रदर्शन।
- 9 अगस्त 2026: 'दिल्ली चलो' के नारे के साथ आंदोलन के प्रथम चरण का भव्य समापन, जहां देश भर के छात्र दिल्ली में एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
कांग्रेस पार्टी ने देश के युवाओं और जागरूक नागरिकों से इस छात्र आंदोलन से जुड़ने की भावुक अपील की है। इसके लिए एक मिस्ड कॉल नंबर 9873036161 और आधिकारिक वेबसाइट www.chhatronkigoonj.in जारी की गई है, जहां छात्र अपना पंजीकरण करा सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह लड़ाई अब महज राजनीतिक नहीं है, बल्कि युवा भारत के सपनों और उनके सुरक्षित भविष्य को बचाने का एक पवित्र छात्र आंदोलन है।


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