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Tuesday, June 30, 2026

सुभारती में नन्हे कलाकारों की प्रतिभा का भव्य प्रदर्शन, 30 दिवसीय कला, संगीत एवं नृत्य कार्यशाला का हुआ गरिमामय समापन

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय द्वारा आयोजित 30 दिवसीय नृत्य, संगीत एवं कला कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। एक माह तक चली इस रचनात्मक कार्यशाला में बच्चों को कथक, हारमोनियम एवं चित्रकला की बारीकियों का विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। समापन समारोह में प्रतिभागी बच्चों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से यह सिद्ध कर दिया कि उचित मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

समारोह का शुभारंभ ललित कला संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद प्रतिभागी बच्चों ने कथक नृत्य, संगीत एवं चित्रकला की आकर्षक प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। मंच पर प्रस्तुत प्रत्येक कार्यक्रम में बच्चों का आत्मविश्वास, अनुशासन और कलात्मक अभिव्यक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई दी। सभागार में उपस्थित अभिभावकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि संगीत और संस्कृति किसी भी सभ्य समाज की आत्मा होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है। ऐसे प्रशिक्षण शिविर बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सृजनात्मक सोच तथा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि सुभारती विश्वविद्यालय भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं नई पीढ़ी तक उसके संवाहन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।


वही दूसरी ओर ललित कला संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को भारतीय शास्त्रीय कला, संगीत एवं चित्रकला की मूल अवधारणाओं से परिचित कराते हुए उनकी सृजनात्मक प्रतिभा को निखारना था। उन्होंने बताया कि 30 दिनों तक चले नियमित प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने अत्यंत समर्पण, अनुशासन और उत्साह के साथ अभ्यास किया, जिसका उत्कृष्ट परिणाम समापन समारोह की प्रस्तुतियों में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी संकाय इस प्रकार के रचनात्मक आयोजनों के माध्यम से युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता रहेगा।

समारोह के दौरान सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में भाग लेने वाले विद्यार्थियों में वान्या, नायरा हितो, अंजनेय रवींद्र, रमा तिवारी, अविष गौर, पृषा अग्रवाल, यशवी, अविका, शनाया आबिद, अलीज़ा, नितारा खरे तथा करन प्रधान सहित अन्य बच्चों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। कार्यक्रम में आकाश भटनागर, प्रो. भावना ग्रोवर, डॉ. पवनेन्द्र तिवारी, लकी त्यागी, अनिशा आनंद, श्रद्धा यादव तथा डॉ. श्वेता चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में उपस्थित अभिभावकों ने बच्चों की प्रस्तुतियों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन की सराहना की।

कार्यशाला में कथक नृत्य का प्रशिक्षण वान्या भगत, गुनगुन पाल एवं ऐश्वर्या उपाध्याय ने प्रदान किया। प्रशिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में बच्चों ने न केवल नृत्य की तकनीकी बारीकियां सीखीं, बल्कि मंचीय प्रस्तुति, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को भी प्रभावी ढंग से विकसित किया। समापन समारोह ने यह संदेश दिया कि जब शिक्षा के साथ कला और संस्कृति का समन्वय होता है, तब विद्यार्थियों का व्यक्तित्व अधिक समृद्ध, संवेदनशील और रचनात्मक बनता है। सुभारती विश्वविद्यालय का यह आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल साबित हुआ।

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