विश्वास राणा
नित्य संदेश, गजरौला। राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास स्थित श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय/संस्थान एवं ’’विम्स’’ सुपरस्पेशियलिटी हाॅस्पीटल के संयुक्त तत्वाँधान में देश के विख्यात चिकित्सक एवं अभी ’’2026’’ में देश के चैथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ’’पद्मश्री’’ से सम्मानित डाॅ0 सुरेश हनगवाडी का वेंक्टेश्वरा संस्थान पहुँचने पर भव्य स्वागत व अभिनन्दन किया गया।
इसके साथ ही मेडिकल स्टूडैन्टस के लिए ’’रोल आॅफ फैक्टर रिप्लेसमेन्ट थेरेपी इन ट्रीटमेन्ट आॅफ हीमोफीलिया’’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए उन्होने कहा कि आईये हम सब मिलकर भारत समेत पूरे विश्व में एक मिलियन से अधिक हीमोफीलिया जैसी दुर्लभ रक्त विकार/बिमारी’’ के उपचार में जुटकर मानवता की सेवा की शपथ ले। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी ने संस्थापक अध्यक्ष की सहमति से डाॅ0 सुरेश को ’’एडवाइजरी बोर्ड’’ में शामिल किये जाने की घोषणा करते हुए कहा कि डाॅ0 सुरेश हनगवाडी की पिछले चार दशको की निस्वार्थ चिकित्सा सेवा, समर्पण, त्याग से प्रेरणा लेकर वेंक्टेश्वरा के हजारो मेडिकल स्टूडैन्टस राष्ट्र सेवा में जुड़कर ’’अन्तोदय’’ तक स्वास्थय सेवाओ के लिए काम करेंगे। प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी ने कुलपति एवं डीन मेडिकल के साथ मिलकर शाॅल, स्मृति चिन्ह एवं बुके भेंटकर उनका अभिनन्दन किया।
श्री वेंक्टेश्वरा संस्थान के डाॅ0 सी0वी0 रमन सभागार में ’’पद्मश्री’’ मिलने एवं ’’रोल आॅफ फैक्टर रिप्लेसमेन्ट थेरेपी इन ट्रीटमेन्ट आॅफ हीमोफिलिया’’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र का शुभारम्भ मुख्य अतिथि पद्मश्री डाॅ0 सुरेश हनगवाडी, प्रतिकुलाधिपति डाॅ0 राजीव त्यागी, कुलपति प्रो0 कृष्ण कान्त दवे, वित्त निदेशक सी0ए0 युवराज सिंह, डीन मेडिकल प्रभु एम0एच0 आदि ने सरस्वती माँ के सन्मुख दीप प्रज्जवलित करके किया।
अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि पद्म श्री डाॅ0 सुरेश हनगवाडी ने कहा कि बचपन में हीमोफिलिया से पीड़ित अपने मामा की समय पर सही उपचार न मिलने से हुई मौत ने उनको अन्दर तक हिला दिया और उन्होने चिकित्सक बनने की शपथ ली। लेकिन ईश्वर की नियति देखिये कि बड़ा हाने पर मुझे पता चला कि मै भी इसी दुर्लभ रक्त विकार की बिमारी हीमोफीलिया से पीड़ित हूँ। लेकिन मैने हार नहीं मानी एवं मैने एम0बी0बी0एस0 व एम0डी0 की परीक्षा सर्वोच्च अंको से पास करने के बाद इस खतरनाक बिमारी से लोगो की जान बचाने के लिए ’’कर्नाटक हीमोफीलिया सोसाइटी’’ की स्थापना की। विगत चालीस वर्षो से इस बिमारी के खिलाफ लड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ-2 हजारो पीडित मरीजो को बिल्कुल निशुल्क उपचार देकर उनकी जान बचाने का काम किया।
इस अवसर पर डाॅ0 आलोक कुमार, डाॅ0 गरिमा भटनागर, डाॅ0 कलीम खान, डाॅ0 मनीष कुमार, डाॅ0 फैजल खिलानी, डाॅ0 शशिधरन, डाॅ0 श्रीरेड्डी कृष्णा, डाॅ0 कमरआलम, डाॅ0 साची अहलावत, डाॅ0 वीर भद्र, डाॅ0 एस0पी0 विट्टल, डाॅ0 नौशाद, डाॅ0 शाकिब, डाॅ0 सेल्वा कुमार, डाॅ0 निपुण, डाॅ0 शिल्पी, डाॅ0 प्रवीलिका, डाॅ0 श्रुति, डाॅ0 निलीशा, डाॅ0 आशी, डाॅ0 अभिनव, डाॅ0 नवनीत कुमार, एस0एस0 बघेल, सचिन, प्रीतपाल, मीडिया प्रभारी विश्वास राणा आदि लोग उपस्थित रहे।




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