नित्य संदेश, इंदौर। शहर में जारी पानी की गंभीर किल्लत को लेकर कांग्रेस द्वारा किया गया प्रदर्शन आज एक बड़े राजनीतिक विवाद और चर्चा का विषय बन गया। एक तरफ जहां कांग्रेस का आरोप है कि इंदौर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन के दौरान मंच पर दिखी तस्वीरों ने इस विरोध प्रदर्शन की गंभीरता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता सड़कों पर नारेबाजी कर रहे थे, ठीक उसी समय खुद को भीषण गर्मी से बचाने के लिए मंच पर नेताओं के लिए 'वीआईपी' व्यवस्थाएं की गई थीं, जिसमें पदाधिकारियों को राहत देने के लिए बड़े-बड़े वाटर कूलर और पानी की बौछार करने वाले मिस्ट फाउंटेन चालू किए गए थे।
जिस पानी की कमी का हवाला देकर यह आंदोलन खड़ा किया गया था, उसी पानी को नेताओं की सहूलियत के लिए हवा में उड़ाया जा रहा था और चिलचिलाती धूप में खड़े कार्यकर्ताओं के विपरीत मंच पर बैठे पदाधिकारी फव्वारों की ठंडी हवा का आनंद लेते नजर आए। दिखावे और जमीनी हकीकत के इस विरोधाभास के बाद विरोधियों ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए इसे महज एक 'ढोंग' और 'सुविधावादी राजनीति' करार दिया है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि जो पार्टी जनता के दर्द को उठाने का दावा कर रही थी, वह खुद जमीन पर उतरकर संघर्ष करने के बजाय सुख-सुविधाओं के बीच घिरी दिखी। पानी की इस फिजूलखर्ची और नेताओं के लिए किए गए इन लग्जरी इंतजामों ने आंदोलन के मूल मुद्दे को ही नेपथ्य में धकेल दिया है, जिससे अब जनता के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह आंदोलन वाकई जनता की प्यास बुझाने के लिए था या सिर्फ नेताओं की सियासत चमकाने का जरिया था।




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