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Tuesday, May 19, 2026

मेरी पुस्तक "लोक - गंध के ललित निबंध" का लोकार्पण "अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी एवं "कृष्ण- बसन्ती अंतरराष्ट्रीय अवार्ड समारोह" में संपन्न हुआ


नित्य संदेश ब्यूरो

उज्जैन। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा अनुदानित प्रथम पुस्तक "लोक - गंध के ललित निबंध" का लोकार्पण सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के वाग्देवी भवन में 18/05/26 अधिक मास शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को "कृष्ण बसंती" अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड समारोह में  सम्पन्न हुआ। साथ ही डॉ मोहन बैरागी जी की पुस्तक "ढाई आखर की खोज" का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया। आयोजन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के परिप्रेक्ष्य: शिक्षा, साहित्य और संस्कृति पर एकाग्र संगोष्ठी में आमंत्रित विद्वतजनों ने अपने उद्बोधन दिए।

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन द्वारा प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अक्षरवार्ता और कृष्ण बसंती शैक्षणिक एवं सामाजिक जनकल्याण समिति के सहयोग से यह आयोजन बहु आयामी रहा जिसमें, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा एवं अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के सम्पादक और कृष्ण बसंती शैक्षणिक एवं सामाजिक जनकल्याण समिति समारोह में देश के दस से अधिक राज्यों के शिक्षाविद, प्राध्यापक, संस्कृतिकर्मी एवं शोधकर्ताओं को अतिथियों द्वारा कृष्ण बसन्ती अंतरराष्ट्रीय अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वाल्मीकि धाम पीठाधीश्वर और राष्ट्रीय सन्त बालयोगी पूज्यश्री उमेशनाथ जी महाराज, (संसद सदस्य, राज्यसभा)  मप्र. शासन रहे। अध्यक्षता हिंदी परिवार के श्री हरेराम बाजपेई इंदौर ने की । सारस्वत अतिथि महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र रहे। विशेष अतिथि श्री राजेशसिंह कुशवाह (सदस्य वि वि कार्यपरिषद) रहे एवं कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा रहे।

पुस्तक पर  समीक्षात्मक आलेख मालवी - हिंदी के प्रखर कवि और "संस्कृति संवाद" के संपादक डॉ राजेश रावल ने पढ़ा।

प्रो डॉ शैलेन्द्र कुमार शर्मा जी ने पुस्तक पर गहन चर्चा करते हुए इसे  निबंध विधा में एक प्रेरणास्पद कदम बताया, उन्होंने पुस्तक के माध्यम से न केवल लोक संस्कृति पुरुष पण्डित रामनारायण उपाध्याय के लोक अवदान को याद किया वरन उन्होंने  लोक ग्राम कालमुखी को भी इस बहाने लोक की धारा का ग्राम निरूपित किया।

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में ओस्लो नॉर्वे से श्री सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक, फिलाडेल्फिया, यूएसए से डॉक्टर मीरा सिंह,  कुशवाह, मॉरीशस से डॉक्टर सोमदत्त काशीनाथ, रवीन्द्रनाथ टैगोर भोपाल,  शिशिर उपाध्याय, बड़वाह, डॉ शहनाज शेख, नांदेड़, महाराष्ट्र, साथ ही उज्जैन के सर्वश्री प्रो जगदीश शर्मन, मुकेश जोशी ( निदेशक प्रेमचंद सृजन पीठ) फिल्म समीक्षक शशांक दुबे, कविवर दिनेश दिग्गज, लघुकथाकार संतोष सुपेकर, दोहाकार कमलेश व्यास कमल,  कवयित्री निशा पंडित, पत्रकार सीमा जोशी, मालवा की चांदनी बहन माया बदेका, प्रो उर्मी शर्मा रंगकर्मी, अक्षय चवरे, समाजसेवी तरुण उपाध्याय, प्रणव व्यास आदि सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे।निमाड़ का प्रतिनिधित्व इटावदी के मनीष पाटीदार ने किया, उन्हें भी सदन ने सम्मानित किया गया। 

कार्यक्रम में विशेषता नई पीढ़ी के शोधार्थी रहे, उन्होंने विषय में गहन रुचि दर्शाई।


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