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Wednesday, May 20, 2026

सीसीएसयू में तीन बड़े एमओयू: शोध, हरित तकनीक और डिजिटल स्किल्स को मिलेगी नई उड़ान

कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला बोलीं— “इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के सहयोग से विद्यार्थी बनेंगे वैश्विक स्तर के प्रोफेशनल”

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में बुधवार को तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (मेमोरंडम और अंडरस्टेंडिंग) पर हस्ताक्षर किए गए। विश्वविद्यालय ने Central Pulp and Paper Research Institute (CPPRI), Indian Agro and Recycled Paper Mills Association (IARPMA) और Adjective PR गाजियाबाद के साथ सहयोग कर शोध, तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल कम्युनिकेशन और कौशल विकास की दिशा में समझौते किए । कुलपति कार्यालय स्थित सेमिनार हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षकों और शोधार्थियों की उपस्थिति रही।


इस अवसर पर कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में विश्वविद्यालयों को केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को उद्योग, तकनीक और रिसर्च से सीधे जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय लगातार ऐसे सहयोगों को बढ़ावा दे रहा है, जिनसे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव, तकनीकी दक्षता और रोजगारोन्मुख अवसर प्राप्त हो सकें। उन्होंने कहा कि इन तीनों समझौतों का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे छात्र रिसर्च प्रोजेक्ट, इंडस्ट्री ट्रेनिंग, इंटर्नशिप, डिजिटल स्किल्स, कंटेंट डेवलपमेंट और आधुनिक तकनीकों से जुड़ सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय से ही देश में नवाचार और आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिलेगी। CPPRI और IARPMA के साथ हुए समझौते के तहत पेपर उद्योग, रिसाइक्लिंग तकनीक, कृषि अवशेषों के उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन और हरित तकनीकों पर संयुक्त शोध एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। विश्वविद्यालय और उद्योग मिलकर पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के विकास तथा सतत औद्योगिक मॉडल तैयार करने की दिशा में कार्य करेंगे।


CPPRI के निदेशक डॉ. आशीष कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच साझेदारी से नई तकनीकों के विकास को गति मिलेगी और विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक समस्याओं पर कार्य करने का अवसर प्राप्त होगा। वहीं IARPMA के सेक्रेट्री जर्नल डॉ. बी.पी. थपलियाल ने कहा कि कृषि अवशेष आधारित और रीसाइक्लिंग आधारित पेपर उद्योग भविष्य की आवश्यकता हैं तथा इस दिशा में अकादमिक सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं, विश्वविद्यालय के तिलक स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन तथा सर छोटूराम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी(SCRIET) के आईटी विभाग ने Adjective PR Private Limited के साथ मीडिया, डिजिटल कम्युनिकेशन, कंटेंट डेवलपमेंट, ब्रांडिंग और प्रोफेशनल स्किल्स से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग हेतु एमओयू किया। इस सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक मीडिया इंडस्ट्री के अनुरूप प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, डिजिटल एक्सपोजर और हैंड्स-ऑन लर्निंग के अवसर प्राप्त होंगे। कार्यक्रम में Adjective PR के निदेशक विभोर शर्मा और श्याम शंकर तिवारी भी उपस्थित रहे, जिनके पास मीडिया, संस्थागत संचार और डिजिटल कम्युनिकेशन के क्षेत्र का लंबा अनुभव है।


कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी, वैज्ञानिक और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।विश्वविद्यालय के रिसर्च डायरेक्टर प्रोफेसर बीरपाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय इन एमओयू को कार्यात्मक बनाते हुए उद्योगों के साथ अपने शोधार्थियों की साझा शोध योजनाओं पर कार्य करने की दिशा में विचार कर रहा है, ताकि शोधार्थियों को उद्योग आधारित शोध एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके तथा वे उद्योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अपने शोध कार्य को आगे बढ़ा सकें। कार्यक्रम संयोजक प्रो. आर.के. सोनी ने बताया कि इस सहयोग से विद्यार्थियों को रिसर्च, कौशल विकास और इंडस्ट्री एक्सपोजर के नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने यह भी  कहा कि Indian Agro and Recycled Paper Mills Association (IARPMA) के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के अनुसार पेपर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को एक “प्रोफेसर चेयर” उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया गया है।


इसके अतिरिक्त उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय से निकलने वाली कागज की रद्दी एवं अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु भी एक प्रभावी प्रणाली विकसित की जाएगी। यह कार्य एमओयू से जुड़े उद्योगों के सहयोग से किया जाएगा, जिस पर विश्वविद्यालय के शोधार्थी शोध कर सकेंगे तथा अपशिष्ट प्रबंधन और पुनर्चक्रण के नए समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य करेंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत “Sustainable Materials for Paper Industries” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें विशेषज्ञ सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, रिसाइक्लिंग तकनीक और वैकल्पिक कच्चे माल के उपयोग पर अपने विचार साझा किए गए। इस दौरान प्रोफेसर मृदुल कुमार गुप्ता, प्रोफेसर हरे कृष्णा,प्रोफेसर बीरपाल सिंह, प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता, प्रोफेसर जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ नीरज सिंघल,डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव, डॉ मानव बंसल, इंजी प्रवीण पंवार, मितेंद्र गुप्ता,डॉ प्रियंका, डॉ निखिल, डॉ मुक्ति, डॉ नाजिया तरन्नुमू आदि मौजूद रहे।

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