नित्य संदेश
क्या फायदा
अंधेरा घना तो तुम दीपक जलाते
आशियाना जलाने से क्या फायदा
रिश्तों में ज़रा तुम गुँजाइश रखते
इन बातों को बढ़ाने से क्या फायदा
राह थी सच्ची तुम अकेले चलते
झुढ़े मजम्मे लगाने से क्या फायदा
चुनके कांटे तुम राह आसान बनाते
यूँ मुश्किलें बढ़ाने से क्या फायदा
हाथों में हाथ तुम हमराह बनते
गढ़बन्धन छुड़ाने से क्या फायदा
साथ में उनके तुम हार भी जाते
अकेले जीत जाने से क्या फायदा ।
अरुण कैलाशनाथ चतुर्वेदी
—लेखक तथा व्यापारी


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