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Saturday, May 30, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय में जेंडर सेंसिटिविटी पर प्रेरक व्याख्यान

संवाद, सहानुभूति और सम्मान से बनेगा समावेशी वातावरण: डॉ. उषा साहनी


नित्य संदेश ब्यूरो


मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के भाषा विभाग द्वारा जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल एवं वीमेन एम्पावरमेंट सेल के संयुक्त तत्वावधान में सॉफ्ट स्किल्स डेवलपमेंट के माध्यम से जेंडर सेंसिटिव स्पेसेज़विषय पर एक प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। भाषा विभाग के एच.आर. लैब में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए जेंडर संवेदनशीलता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।


कार्यक्रम का आयोजन भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा के निर्देशन में संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मेरठ की अंग्रेजी विभाग की वरिष्ठ प्रो. (डॉ.) उषा साहनी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने वर्तमान सामाजिक एवं शैक्षणिक परिवेश में जेंडर संवेदनशीलता की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान, कार्यस्थल अथवा सामाजिक वातावरण को सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी बनाने में सॉफ्ट स्किल्स की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।


डॉ. साहनी ने विद्यार्थियों को समावेशी भाषा के प्रयोग, सहानुभूति, सकारात्मक संवाद, सक्रिय श्रवण तथा व्यवहारिक संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण गुणों के महत्व को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए बड़े अभियानों की अपेक्षा छोटे-छोटे व्यवहारिक बदलाव अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में सम्मान, समानता और संवेदनशीलता को स्थान दे, तो एक अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज का निर्माण संभव है।


व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने जेंडर समानता और संवेदनशील व्यवहार से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. साहनी ने विस्तारपूर्वक और सरल भाषा में उत्तर दिया। कार्यक्रम का संवादात्मक स्वरूप प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा। विद्यार्थियों ने भी अपने विचार साझा करते हुए दैनिक जीवन, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर जेंडर-संवेदनशील व्यवहार अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

कार्यक्रम के दौरान विभागीय स्तर पर आधिकारिक सूचनाओं एवं संवाद में समावेशी भाषा के प्रयोग को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर इन्क्लूसिव कम्युनिकेशन सर्किलजैसी गतिविधियों के आयोजन का प्रस्ताव भी रखा गया। इस पहल को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्योंगुणवत्तापूर्ण शिक्षा (SDG-4), लैंगिक समानता (SDG-5) तथा असमानताओं में कमी (SDG-10)—के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।


कार्यक्रम के अंत में भाषा विभाग की ओर से मुख्य वक्ता डॉ. उषा साहनी, जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल एवं वूमेन एम्पावरमेंट सेल के सभी सदस्यों का कार्यक्रम की सफलता में सहयोग हेतु हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। यह आयोजन विश्वविद्यालय की समावेशी, संवेदनशील एवं प्रगतिशील शैक्षणिक संस्कृति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

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