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Monday, May 11, 2026

सोमनाथ संकल्प महोत्सव में बोले सीएम: विकास की नई यात्रा को लेकर आगे बढ़ रहा यूपी

नित्य संदेश ब्यूरो

वाराणसी। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत सोमवार को सोमनाथ संकल्प महोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन हुआ, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन व प्रेरणा देशवासियों को मिल रहा है, प्रधानमंत्री का आभार, जिनकी प्रेरणा से हम सब एक भारत, श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साकार होते देख रहे हैं। जिसका साकार रूप सौराष्ट्र में भगवान सोमनाथ महादेव के भव्य मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा, सुंदरीकरण और कार्यक्रम के साथ,काशी में काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल में महालोक की स्थापना कार्यक्रम, अयोध्या धाम में श्रीरामजन्मभूमि के निर्माण का कार्यक्रम अनेक सनातन परंपरा से जुड़े हुए पवित्र तीर्थस्थल अपने वैभव के साथ विकास की नई यात्रा को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इन सबके प्रेरक शक्ति भारत के प्रधानमंत्री का उत्तरप्रदेश वासियों की तरफ से अभिनन्दन करता हूँ।


सीएम ने कहा कि दुर्भाग्य से आज बहुत ऐसी शक्तियां है,जो भारत की इस आत्मगौरव के प्रतीक स्वाभिमान के प्रतीक,इन आध्यात्मिक व सांस्कृतिक स्थलों को स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ते हुए देखना नही चाहते। हम जानते हैं कि कौन लोग थे,जो सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बाधक थे,ये वही लोग थे जिन लोगों ने कालांतर में श्रीराम मंदिर के निर्माण में और इस समस्या का समाधान न हो,इसमे भी उन्होंने बारम्बार बाधाएं खड़े करने का प्रयास किया। वह एक अवसर था,जब स्वतंत्र भारत इन कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकता था, लेकिन भारत के इस आत्मगौरव को पुनर्प्रतिष्ठा प्रदान करने की सोच का अभाव था।


हम सब जानते हैं मो.गोरी से लेकर मुगलों तक,कई विदेशी आतताइयों ने हमारी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया। औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर एक गुलामी का ढांचा भी यहां खड़ा किया,लेकिन वो भारत की आत्मा को तोड़ नही पाए। वो नही समझ पाए,सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में ही नही,अपितु भारत की चेतना में बसता है, और भारत की चेतना, आत्मा को अजर,अमर मानकर चलती है,यही भारत की अजरता,अमरता का शास्वत शंखनाद भारत की आध्यात्मिक,सांस्कृतिक विरासत में हम सबके सामने झलकती है। जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया,आज वह स्वयं मिट्टी में मिल चुके हैं,आज उन आक्रांताओ का नाम लेने वाला कोई नही है, लेकिन काशी विश्वनाथ धाम हो या सोमनाथ महादेव का मंदिर ये दोनों भारत के स्वाभिमान की गाथा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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