नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठः स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के मांगल्य प्रेक्षागृह में उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान से विभूषित ओजस्वी कवि एवं राष्ट्रचिंतक डॉ. हरिओम पंवार के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में “अमृत महोत्सव” का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में देशभर से आए संतों, विद्वानों, साहित्यकारों एवं गणमान्य अतिथियों ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए डॉ. पंवार के दीर्घायु की कामना की। कार्यक्रम में योगगुरु स्वामी रामदेव, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं संत स्वामी चिदानंद सरस्वती, वातसल्य ग्राम की संस्थापिका तथा प्रखर राष्ट्रवादी संत साध्वी ऋतंभरा, पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं आध्यात्मिक गुरु डॉ. पवन सिन्हा, सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश पंकज मित्तल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व जज सुधीर अग्रवाल, सुदर्शन टीवी के संस्थापक सुरेश चव्हाणके, सुभारती विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया। इस अमृत महोत्सव रुपी शुभकामना समारोह की शुरुआत पारंपरिक रुप से दीप प्रज्ज्वलन व सुभारती ललित कला संकाय के विद्यार्थियों के द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के साथ हुई।
इस अवसर पर सुभारती ग्रुप के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण के नेतृत्व में डॉ. शल्या राज, डॉ. रोहित रविन्द्र, डॉ. कृष्णामूर्ति, अवनी कमल, अमित जोशी एवं डॉ. आकांक्षा के द्वारा सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में स्थित आईएनए शहीद समारक एवं उपवन में सुभारती परिवार की ओर से डॉ. हरिओम पंवार के हाथों से मधुकामिनी का पौधा भी रोपित करवाया गया और उनके स्वस्थ तथा दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की गई। इसके पश्चात ललित कला संकायाध्यक्ष डॉ. पिंटू मिश्रा के मार्गदर्शन में ललति कला के विद्यार्थियों द्वारा डॉ. पंवार का चित्र उनको भेंट किया गया। वहीं सुभारती समूह के श्रमिक विद्यालय ईश्वर चंद्र विद्यासागर श्रमिक विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा डॉ. पंवार को सुभारती विश्वविद्यालय की सीईओ डॉ. शल्या की प्रेरणा से संस्कृत गीत के माध्यम से जन्मदिन की बधाई दी गई जिसकी सभी ने करतल ध्वनि के साथ मुक्तकंठ से सराहना की।
इस अवसर पर सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि डॉ. हरिओम पंवार स्वस्थ व दिर्घायु तो हों ही किंतु परात्मा इनकी वाणी की ओजस्विता को यूं ही सशक्त तब तक बनाए रखे जब तक भारत के हर कोने में रहने वाले व्यक्ति राष्ट्रीय चरित्रवान ना हो जाएं। कार्यक्रम में योगगुरु स्वामी रामदेव, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं संत स्वामी चिदानंद सरस्वती, वातसल्य ग्राम की संस्थापिका तथा प्रखर राष्ट्रवादी संत साध्वी ऋतंभरा, आयुर्वेदाचार्य व पतंजलि योगपीठ के अध्यक्ष आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं आध्यात्मिक गुरु डॉ. पवन सिन्हा आदि ने अपने संबोधन में डॉ. पंवार को जन्मदिन की शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद देते हुए इनके दीर्घायु व सुफल जीवन की मंगल कामना की। इस दौरान बाबा रामदेव ने सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण की प्रशंसा करते हुए कहा कि डॉ. अतुल ने सुभारती विश्वविद्यालय में जिस प्रकार से शिक्षा, सेवा, संस्कार तथा राष्ट्रीयता की राष्ट्रवादी भावना को अपने विद्यार्थियों व विश्वविद्यालय के सभी कमर्चारियों में रोपित कर रहे हैं व अतुलनीय है और इनका यही प्रयास एक दिन भारत को विश्वगुरु बनाने में महती भूमिका निभाएगा।
वहीं दूसरी ओर डॉ. पंवार की प्रशंसा करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि डॉ. पंवार ने सदा देश के लिए आवश्यक राष्ट्रीय मुद्दों और विमर्श को अपना स्वर दिया है। जब कभी देश की बात आती है तो इनका स्वर हिमालय से भी ऊंचा हो जाता है। हमारे लिए तो डॉ. पंवार भारत रत्न हैं। वहीं साध्वी ऋतंभरा ने अपनी शुभाकामना देते हुए कहा कि डॉ. पंवार का नाम हरिओम ऐसा नाम है जो लोक व परलोक दोनों का तारक है। डॉ. पंवार को अपना आशीर्वाद देते हुए स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आप राष्ट्रीय चेतना के स्वर हैं आपकी लेखनी एवं वाणी दोनों सदा यूं ही तेजमयी व ओजस्वी बनी रहे यही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है। इस दौरान स्वामी रामदेव व स्वामी चिदानंद सरस्वती के निर्देश पर डॉ. पंवार ने अपनी ओजस्वी वाणी में अपनी कविता “आसमान के तारे नहीं तोड़ता मैं, जुगनू चंदा मामा नहीं जोड़ता मैं” को सुनाकर उपस्थित जनसमूह में ऊर्जा का अप्रतिम संचार किया। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी का हृदय से आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने डॉ. हरिओम पंवार के साहित्यिक योगदान, राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत काव्य शैली तथा भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उनके अमूल्य योगदान की मुक्त कंठ से सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. पंवार की कविताएं केवल शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का जीवंत स्वर हैं, जो युवाओं में देशभक्ति और संस्कारों का संचार करती हैं। मांगल्य प्रेक्षागृह में आयोजित इस अमृत महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, काव्य रसधारा और आध्यात्मिक वातावरण ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिवार, देश के विभिन्न अंचलों से आए हुए कवि व कवियत्रियों एवं साहित्य प्रेमियों तथा विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही, जिससे पूरा परिसर उत्साह, ऊर्जा और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत दिखाई दिया।
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