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Sunday, May 31, 2026

संयुक्त परिवार में रहकर बच्चे सीखते थे संस्कार: महेंद्र रस्तोगी

 

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। कंकर खेड़ा, शिवलोक स्थित किसान गर्ल्स इंटर कालेज में वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति की मासिक बैठक संपन्न हुई जिसमें समिति के कार्यों एवं गतिविधियों की जानकारी दी गई। समिति की आगे की योजनाओं पर चर्चा की गई। 


"बच्चों में नैतिक मूल्यों का संवर्धन" विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिस पर सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए। जयवीर सिंह, सोमपाल सिंह, प्रोफेसर विरेन्द्र सिंह के विचार थे कि जबसे परिवारों में विघटन हुआ है तभी से संस्कारों के नैतिक मूल्यों का हास् हुआ है। संयुक्त परिवार में रहकर बच्चे संस्कार सीखते थे। बड़ो के आचार- विचार, व्यवहार का अनुसरण करते थे। यशपाल सिंह जांगिड़ एवं राजीव गुप्ता, धर्म पाल के विचार थे कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और समय के उस परिवर्तन में हम इतना आगे निकल गए कि  संस्कार बहुत पीछे छुट गये। इन्हें संजोना था संवारना था लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में हम अपनी संस्कृति से ही दूर होते जा रहे हैं। बच्चों के हाथ में मोबाइल थमा देना, अपने बड़ों का सम्मान न करना, परिवार का बहुत सीमित होना संस्कारों की हत्या करना है।


समिति अध्यक्ष महेन्द्र कुमार रस्तौगी ने कहा कि मां बाप दोनों के पास अपने बच्चों में संस्कार देने के लिए समय नहीं है।यदि हम चाहते हैं कि हमारा समाज सुरक्षित,सभ्य और संस्कारित बने तो हमें बच्चों को सुसंस्कार देने होंगे। परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करना और संस्कारवान बनना दो अलग-अलग पहलु हैं। शिक्षा जीवन को दिशा देती है पर संस्कार जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं।संस्कारवान व्यक्ति ही देश को प्रगति के पथ पर ले जा सकते हैं क्योंकि आज के बच्चे ही,कल देश का आने वाला भविष्य है।


इस अवसर पर विमलकांत कौशिक, जगदीश कुमार, राजेन्द्र कौशल,मुलख राज, श्री पाल सिंह, दीनदयाल सत्यपाल सिंह,सुमन कांत अरोरा,महेश कुमार मिश्रा,अजय मोहन शर्मा, राम किशोर गर्ग,शशि बाला, हेमलता, कुसुम लता,मंजु आदि उपस्थित रहे।


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