दिन की तपन का अहसास रात की गर्म हवाएं भी...
सरकारी अस्पतालों में बनाए 14 हीट स्ट्रोक क्लिनिक
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। शहर में भीषण गर्मी ने लोगों को हलाकान कर दिया है। स्थिति यह है कि तेज धूप लोगों को झुलसा रही है। दिनभर लू के थपेड़ों का जनजीवन पर काफी असर दिखाई दे रहा है और दिन में सडकें पहले की तुलना सूनी नजर आ रही है। शहर में दूसरे दिन भी पारा 43 डिग्री पार रहा और लोगों में काफी बेचैनी दिखाई दे रही है।
मंगलवार को दिनभर गर्म हवाओं और तपिश से गर्म हुई सड़कों का रात को भी असर रहा। रात 9 बजे तक गर्म हवाएं ही चलती रही। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बुधवार को भी काफी तपिश रहेगी और तापमान और भी ज्यादा बढ सकता है। गर्मी और लू के इलाज के लिए प्रशासन ने जिला अस्पताल, सिविल अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 14 हीट स्ट्रोक क्लिनिक बनाए हैं।.... स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
दरअसल, इन दिनों तापमान बढ़ने और गर्म हवा लगने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती है। बुजुर्ग, बच्चे, खिलाड़ी, धूप में काम करने वाले श्रमिक सर्वाधिक खतरे में रहते हैं। पसीना न आना, गर्म-लाल एवं शुष्क त्वचा, मतली, सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, उल्टियां होना, बेहोश हो जाना एवं पुतलियां छोटी हो जाना अत्यधिक गर्मी से प्रभावित होना व तापघात के प्रमुख लक्षण एवं संकेत हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
- गर्मी व तापघात से बचाव के लिए खूब पानी पीएं और खाली पेट न रहें।
- शराब व चाय-कॉफी के अधिक सेवन से बचे।
- ठण्डे पानी से नहाएं, सिर ढके व हल्के रंग के ढीले व पूरी बांह के कपड़े पहने।
- बच्चों को बंद वाहनों में अकेला न छोड़े।
- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर जाने से बचे।
- धूप में नंगे पैर न चलें और बहुत अधिक भारी काम न करें।
- नागरिकों से अपील की गई है कि बाहर निकलना आवश्यक हो तो धूप से बचाव के लिए छतरी और धूप के चश्मे का उपयोग करें।....धूप में निकलने से पहले कम से कम दो गिलास पानी अवश्य पीएं।
- बुखार और लू लगने की स्थिति में पास के अस्पताल में संपर्क कर आवश्यक दवा का उपयोग सुनिश्चित करें।
- ओआरएस का घोल, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, फलों का रस आदि का सेवन करें। इन सभी का उपाय कर गर्मी के प्रभाव से बचा जा सकता हैं।
ऐसी है विशेष व्यवस्था
जिला अस्पताल, सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लू बचाव के लिए, प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए विशेष कक्ष बनाए गए हैं। इसमें आवश्यक दवाइयों के साथ-साथ ओआरएस के पैकेट, कूलर एवं पंखों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केन्द्रों और आयुष्यमान आरोग्य मंदिरों पर ओआरएस कॉर्नर बनाए गए हैं।



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