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Sunday, May 24, 2026

व्यवसाय बंद, फिर भी धरने पर क्यों बैठी हैं शास्त्री नगर सेक्टर 2, 3 और 4 की महिलाएं? सेटबैक विवाद ने बढ़ाई चिंता


तरुण आहूजा

नित्य संदेश, मेरठशास्त्री नगर के सेक्टर 2, 3 और 4 में इन दिनों महिलाओं का धरना चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकांश महिलाओं ने अपने छोटे-छोटे व्यापार बंद कर दिए हैं, तब भी वे धरने पर आखिर क्यों बैठी हैं? यह सवाल सिर्फ स्थानीय लोगों के बीच नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। महिलाओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल कारोबार की नहीं, बल्कि उनके आशियाने, भविष्य और परिवार की सुरक्षा से जुड़ी है।


करीब 35 से 40 वर्ष पहले, शास्त्री नगर क्षेत्र में आवास विकास द्वारा लोगों को मकान आवंटित किए गए थे। उस समय कई परिवारों ने 125 और 150 रुपये मासिक किस्तों पर ये मकान लिए थे। आर्थिक परिस्थितियां कठिन थीं। कई परिवारों ने कर्फ्यू, आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच अपने घरों की किस्तें भरीं। घर चलाना आसान नहीं था, लेकिन परिवारों ने संघर्ष कर अपने सपनों का आशियाना खड़ा किया। इन्हीं संघर्षों के बीच महिलाओं ने अपने घरों को आत्मनिर्भरता का जरिया बनाया। किसी ने घर में सिलाई-कढ़ाई और बुनाई का काम शुरू किया, किसी ने ब्यूटी पार्लर खोला, तो किसी ने कॉस्मेटिक, ट्यूशन, घरेलू सामान या छोटे स्तर का व्यवसाय शुरू कर परिवार की आर्थिक मदद की। इन छोटे-छोटे व्यवसायों से मकानों की किस्तें जमा होती रहीं, घर का खर्च चला, बच्चों की पढ़ाई हुई और बेटियों की शादियां तक संपन्न हुईं। महिलाओं को लगने लगा था कि संघर्ष के दिन पीछे छूट चुके हैं।


लेकिन हालात तब बदलने शुरू हुए जब सेंट्रल मार्किट स्थित 661/6 को लेकर विवाद सामने आया। मामला आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन से जुड़ा था। विवाद इतना बढ़ा कि 661/6 का ध्वस्तीकरण कर दिया गया। इसके बाद शास्त्री नगर में चिंता का माहौल बन गया और आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यवसायों पर सवाल खड़े होने लगे। महिलाओं का कहना है कि जब व्यवसाय बंद करने की बात आई, तब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और कानून का सम्मान करते हुए अपने छोटे व्यापार बंद कर दिए। लेकिन अब जो नया मुद्दा सामने आया है, वह है “सेटबैक”। महिलाओं के अनुसार, अब केवल व्यापार ही नहीं बल्कि मकानों की संरचना और निर्माण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे उनके घरों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।


धरने पर बैठी महिलाओं का सवाल है कि यदि वर्षों पहले मकानों के नक्शे, निर्माण और कॉलोनियों की व्यवस्था में कोई त्रुटि थी, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? यदि नियमों का उल्लंघन हुआ, तो इतने वर्षों तक विभाग ने आपत्ति क्यों नहीं जताई? अब अचानक लोगों को असुरक्षा और कार्रवाई के डर में क्यों जीना पड़ रहा है? धरने में शामिल महिलाओं का कहना है कि उन्होंने व्यवसाय बंद कर दिए हैं, लेकिन अब यह आंदोलन उनके घर बचाने और भविष्य सुरक्षित रखने की लड़ाई बन चुका है। उनका आरोप है कि यदि सेटबैक के नाम पर कार्रवाई हुई, तो हजारों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।


धरना स्थल पर बैठी कई महिलाएं अपने बंद व्यापार के बावजूद विरोध दर्ज करा रही हैं। इनमें राधा गुप्ता, जिनका व्यवसाय बंद है, फिर भी वे धरने पर बैठी हैं। वहीं शालू शर्मा  ओर शीतल पुंजानी, अंजना ,जैसी दर्जनों महिलाओं ने भी अपना व्यापार बंद कर दिया, लेकिन वह भी आंदोलन का हिस्सा बनी हुई हैं। महिलाओं का कहना है कि यह केवल  चार नाम नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की आवाज है जो वर्षों से अपने घरों और छोटे रोजगार के सहारे जीवन चला रहे हैं।


अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आवास विकास ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा, क्यों कहा, और यदि कॉलोनी के निर्माण में कोई खामी थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या दशकों पुराने मकानों और परिवारों को अब नए नियमों की कसौटी पर परखा जाएगा, या फिर कोई ऐसा समाधान निकलेगा जिससे कानून का सम्मान भी बना रहे और आम लोगों का जीवन भी प्रभावित न हो?

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