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Tuesday, May 5, 2026

11.75 किलोग्राम वज़न वाले विशाल रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा (ट्यूमर) का सफलतापूर्वक किया गया उच्छेदन

 

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। मेडिकल कॉलेज में शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा 11.75 किलोग्राम वज़न वाले विशाल रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा (ट्यूमर) का सफलतापूर्वक उच्छेदन (एक्सीजन) किया गया। मरीज़ धीर सिंह उम्र ५० साल निवासी मोदीनगर का 11.75 किलोग्राम वज़न वाले विशाल रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा(ट्यूमर) का सफलतापूर्वक उच्छेदन (एक्सीजन) कर रोगी को कैंसर-मुक्त स्थिति में घर के लिए छुट्टी पर भेज दिया है। 


यह जटिल शल्य प्रक्रिया डॉ. (प्रो.) संजीव कुमार के नेतृत्व में सहायक आचार्य डॉ. शुभम यादव, सीनियर रेज़िडेंट्स डॉ. आकांक्षा सिंह, डॉ सिद्धार्थ, डॉ नौशाद, डॉ आयुष, डॉ मीनाक्षी और एनेस्थीसिया टीम के संयुक्त एवं समन्वित प्रयासों से सफल हुई। इस सर्जरी की मुख्य उपलब्धि 11.75 किलोग्राम वज़न वाले विशाल रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर का एन ब्लॉक उच्छेदन करते हुए ट्यूमर को पूर्णतः हटाया गया। इस जटिल प्रक्रिया के दौरान ट्यूमर ने दाएं गुर्दे (Right Kidney) को पूरी तरह से घेर लिया था, जिसे अत्यंत सावधानीपूर्वक और सूक्ष्म विच्छेदन (meticulous dissection) के माध्यम से संरक्षित किया गया, ताकि रोगी के गुर्दे के कार्य और जीवन की गुणवत्ता (quality of life) से समझौता न हो। बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) टीम द्वारा समयबद्ध ऑपरेशन, एनेस्थीसिया, ICU व पोस्ट-ऑपरेटिव प्रबंधन के माध्यम से रोगी के लिए सुरक्षित एवं कैंसर-उन्मुख (ऑन्कोलॉजिक) उपचार सुनिश्चित किया गया।


रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा के बारे में

रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा एक दुर्लभ, गहन उदर-गुहा (retroperitoneum) में उत्पन्न होने वाला सॉफ्ट टिशू कैंसर है, जो वयस्क घातक ट्यूमर का वार्षिक अनुमानित इंसीडेंस लगभग 0.5–1 प्रति 100,000 आबादी माना जाता है। ये ट्यूमर अक्सर लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ते रहते हैं और जब इनका आकार बहुत बड़ा हो जाता है, तब पेट में सूजन, दर्द, भूख में कमी या आस-पास के अंगों पर दबाव के कारण लक्षण प्रकट होते हैं।


जोखिम कारक (Risk Factors)

वैज्ञानिकों के अनुसार, रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा के विकास में कुछ निम्नलिखित कारक भूमिका निभा सकते हैं - 

कुछ वंशानुगत कैंसर सिंड्रोम  

(जैसे Li-Fraumeni syndrome, Neurofibromatosis type 1, Familial adenomatous polyposis आदि)

पूर्व में दी गई रेडिएशन थेरेपी (पेट/रीढ़/पेल्विक क्षेत्र में) के बाद दीर्घ अवधि में सारकोमा बनने का जोखिम बढ़ सकता है।

कुछ औद्योगिक/रासायनिक पदार्थों का लम्बे समय तक एक्सपोज़र (जैसे asbestos, vinyl chloride, arsenic और कुछ herbicides)।[moffitt]

कई रोगियों में कोई स्पष्ट जोखिम कारक नहीं मिलता और ट्यूमर स्वतः विकसित हो जाता है।


शल्य चिकित्सा विभाग ने प्रक्रिया के बारे में बताया कि मिडलाइन लैपरोटॉमी के माध्यम से उदर का विस्तृत एक्सप्लोरेशन कर रेट्रोपेरिटोनियल क्षेत्र में स्थित विशाल ट्यूमर की सीमा, आस-पास के अंगों (किडनी, कोलन, पैंक्रियास, डुओडीनम, यूरेटर आदि) व प्रमुख रक्त वाहिकाओं (एओर्टा, IVC, रीनल वेसल्स) के संबंध का आकलन किया गया एन ब्लॉक ट्यूमर रिसेक्शन: ताकि ट्यूमर की मैनिप्युलेशन से कैंसर कोशिकाओं के फैलाव को न्यूनतम रखा जा सके। ट्यूमर बेड की meticulous hemostasis, ड्रेनेज के पश्चात सैंपल को पूर्ण रूप से ओरिएंट कर हिस्तोपैथोलॉजिकल जांच हेतु भेजा गया, जिसमें माइक्रोस्कोपिक स्तर पर ट्यूमर-फ्री (R0) मार्जिन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया।


रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा का एन ब्लॉक, R0 रिसेक्शन उच्च-कौशल, दीर्घ अवधि और संसाधन-सघन शल्य प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें शल्य चिकित्सक, मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट एवं क्रिटिकल केयर टीम की समन्वित भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। रोगी के ट्यूमर के आकार, स्थान, आस-पास के अंगों की भागीदारी और पूर्व-रोग स्थिति के अनुसार ऑपरेशन की अवधि कई घंटों तक चल सकती है तथा सावधानीपूर्वक प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग और पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग से ही सुरक्षित एवं सफल परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।


उपरोक्त सर्जरी हेतु प्राइवेट चिकित्सालयों में लगभग २-५ से ५.० लाख रुपये का खर्चा आता है,वही मेडिकल कॉलेज मेरठ में सरकारी दरो पर इलाज किया गया है। प्राचार्य डॉ आर सी गुप्ता ने सफल सर्जरी हेतु शल्य चिकित्सा विभाग को शुभकामनाएँ दी।

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