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Sunday, May 31, 2026

वाईस ऑफ डीसी मामले में बड़ा कानूनी मोड़, क्राइम ब्रांच ने चारों आरोपियों पर बढ़ाईं गंभीर धाराएं, मोबाइल जब्त; अब 10 वर्ष तक की सजा वाले प्रावधान भी शामिल

नवीन मौर्य

नित्य संदेश,​ इंदौर डेली कॉलेज को बदनाम करने के उद्देश्य से संचालित किए गए कथित फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म “Voice of DC” मामले में जांच अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। क्राइम ब्रांच द्वारा विस्तृत डिजिटल जांच के बाद चारों आरोपियों—संदीप पारेख, अनुराग जैन, रंजीत सिंह नामली और मनवीर सिंह बायस—के खिलाफ अतिरिक्त गंभीर धाराएं जोड़ दी गई हैं। साथ ही, जांच एजेंसियों ने चारों आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है।

​सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में प्राप्त डिजिटल सामग्री, सोशल मीडिया पोस्ट, चैट रिकॉर्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार के परीक्षण के बाद यह पाया गया कि मामला केवल भ्रामक पोस्ट या सामान्य सोशल मीडिया टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुनियोजित डिजिटल प्रतिरूपण, भ्रामक प्रस्तुति, आपत्तिजनक सामग्री का प्रसारण और गंभीर आपराधिक तत्व सामने आए हैं।

​क्राइम ब्रांच ने अब मामले में भारतीय दंड संहिता तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। इनमें धारा 336 और 338 के अंतर्गत ऐसे कृत्य शामिल हैं जिनसे व्यक्तियों की सुरक्षा और गरिमा को गंभीर क्षति पहुंचाने का खतरा उत्पन्न हुआ। धारा 340 और 342 के अंतर्गत अवैध निरुद्धीकरण से जुड़े प्रावधानों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग कर प्रतिरूपण और धोखाधड़ी तथा धारा 67A के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यौन प्रकृति की आपत्तिजनक सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण जैसी गंभीर धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

​कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इन धाराओं में दोष सिद्ध होने की स्थिति में आरोपियों को 10 वर्ष तक की सजा का सामना करना पड़ सकता है।

​जांच एजेंसियों के अनुसार, जब्त मोबाइल उपकरणों से प्राप्त डिजिटल डेटा अब यह स्पष्ट करेगा कि आपत्तिजनक सामग्री किस स्तर पर तैयार की गई, किसके निर्देश पर प्रसारित हुई और इसके पीछे किस प्रकार की समन्वित रणनीति कार्य कर रही थी।

​डेली कॉलेज से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह वही मामला है जिसमें पहले से ही आरोप था कि “Voice of DC” प्लेटफॉर्म के माध्यम से संस्था, प्राचार्या, शिक्षकों और बोर्ड सदस्यों के खिलाफ अत्यंत आपत्तिजनक, अश्लील और मानहानिकारक सामग्री सुनियोजित तरीके से प्रसारित की गई थी।

​जांच के दौरान सामने आए चैट रिकॉर्ड्स और डिजिटल संकेतों ने इस आशंका को और मजबूत किया है कि यह अभियान केवल असहमति व्यक्त करने का माध्यम नहीं था, बल्कि संस्था की छवि को व्यवस्थित रूप से क्षति पहुंचाने की एक सुनियोजित डिजिटल रणनीति का हिस्सा था।

​डेली कॉलेज से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने इस कार्रवाई को संस्था की गरिमा की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि डेली कॉलेज जैसी 155 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित संस्था के खिलाफ यदि कोई डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर झूठ, अश्लीलता और भ्रामक सामग्री फैलाने का प्रयास करेगा, तो कानून अपना काम करेगा।

​सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जांच एजेंसियां मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही हैं और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

​डेली कॉलेज समुदाय ने इसे सत्य, गरिमा और संस्थागत मर्यादा की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति बताया है।

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