नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की साहित्यिक–सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में साप्ताहिक कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत भारत रत्न, संविधान निर्माता डॉ० भीम राव आंबेडकर जयंती के अवसर पर दिनांक (11 अप्रैल 2026) को ऑनलाइन क्विज़ प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया था । यह प्रतियोगिता डॉ. अम्बेडकर के जीवन, विचारों, संविधान निर्माण में उनके योगदान एवं सामाजिक न्याय की अवधारणा पर आधारित थी।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें कुल 115 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इस आयोजन ने विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, समानता एवं सामाजिक जागरूकता के प्रति समझ को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे—
🥇 प्रथम स्थान – सिल्की चौधरी (बी.ए. ऑनर्स, राजनीति विज्ञान, चतुर्थ सेमेस्टर)
🥈 द्वितीय स्थान – अनिरुद्ध मावी (एम.ए. समाजशास्त्र)
🥉 तृतीय स्थान – जय मलिक (एम.ए. समाजशास्त्र)
🎖 सांत्वना पुरस्कार – दीप्ति सिंह (बी.ए. ऑनर्स) एवं नोएरा खान (बी.ए. ऑनर्स, राजनीति विज्ञान)
विजेताओं का सम्मान समारोह शिक्षाशास्त्र विभाग के सेमिनार हॉल में गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता (अध्यक्ष), प्रोफेसर के. शर्मा (समन्वयक, साहित्यिक–सांस्कृतिक परिषद), प्रोफेसर दिनेश कुमार (निदेशक, माननीय काशीराम शोध पीठ), प्रोफेसर राकेश कुमार शर्मा (डीन, शिक्षा शास्त्र विभाग), डॉ. योगेंद्र गौतम, डॉ. जितेंद्र सिंह गोयल सहित विभिन्न विभागों के सम्मानित शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. देवकीनंदन भट्ट (समाजशास्त्र विभाग) द्वारा किया गया तथा सह–संयोजन डॉ. मुनेश कुमार (राजनीति विज्ञान विभाग) द्वारा किया गया।
इसी अवसर पर एक प्रेरणादायी व्याख्यान का भी आयोजन किया गया, जिसका शीर्षक था “विकसित भारत की परिकल्पना और अंबेडकरवादी चिंतन: सामाजिक न्याय से ज्ञान-आधारित समावेशी राष्ट्र की ओर”। इस व्याख्यान में प्रोफेसर दिनेश कुमार ने डॉ. अम्बेडकर के विराट व्यक्तित्व, उनके दूरदर्शी चिंतन, सामाजिक न्याय के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता तथा ज्ञान-आधारित समावेशी राष्ट्र के निर्माण की उनकी परिकल्पना पर अत्यंत प्रभावशाली एवं हृदयस्पर्शी विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने अपने वक्तव्य में यह रेखांकित किया कि डॉ. अम्बेडकर का चिंतन केवल संविधान तक सीमित नहीं, बल्कि एक ऐसे भारत के निर्माण का मार्गदर्शन करता है जो समानता, शिक्षा और अवसरों की न्यायपूर्ण उपलब्धता पर आधारित हो।
यह आयोजन विद्यार्थियों में डॉ. अम्बेडकर के आदर्शों समानता, न्याय एवं बंधुत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम सिद्ध हुआ तथा उन्हें एक समावेशी और विकसित भारत के निर्माण हेतु प्रेरित किया।



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