नित्य संदेश ब्यूरो
रोहटा। डूंगर गांव में दशकों से संचालित चर्म शोधन कारखाने से फैलने वाले प्रदूषण के चलते एनजीटी द्वारा जिला प्रशासन को तत्काल दिए गए बंदी के आदेश के बाद कोई कार्यवाही न किए जाने से नाराज मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को सुनवाई करते हुए जिला अधिकारी की नीयत पर संदेह जाहिर किया, प्रमुख सचिव को एक सप्ताह में बंदी की कार्यवाही रिपोर्ट देने के आदेश दिए। लखनऊ से प्रमुख सचिव के आदेश आते ही जनपद के आला अधिकारियों का अमला डूंगर गांव में स्थित चर्म शोधन कारखाने में पहुंचा। ग्रामीणों को दो दिन का समय दे अधिकारियों की टीम वापस लौट गई।
शनिवार को अपर नगर मजिस्ट्रेट बृजेश सिंह ओर एसडीएम सदर दीक्षा जोशी तहसील टीम के साथ दोपहर के समय डूंगर गांव में पहुंचे ओर सैकड़ों वर्षों से संचालित चर्म शोधन कारखाने से फैल रहे प्रदूषण को देख अधिकारी दंग रह गए। रोहटा ब्लॉक क्षेत्र के डूंगर गांव में दशकों से एक चर्मशोधन कारखाना संचालित है जिसमें गांव के 50 परिवार चमड़ा रंगने का कार्य करते हैं। यह कारखाना दशकों पूर्व गांव की आबादी के बीच संचालित था। उस समय गांव निवासी एडवोकेट नरेंद्र सिंह ने कारखाने से फैलने वाले प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट में जन हित याचिका दायर कर कई वर्षों तक मुकदमा चलाया था। उसके बाद प्रशासन ने सन 2004 में कारखाने को आबादी से बाहर शिफ्ट कराने का हलफनामा दायर कर केंद्र व प्रदेश की सरकार के सहयोग से 4 करोड रुपए की लागत से कारखाने का उच्चीकरण कर संचालित करने का निर्णय लिया था। पूर्व डीएम अवनीश अवस्थी ने हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर एक प्रपोजल तैयार कराकर ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग को उच्चीकरण करने का जिम्मा सौंपा था। उक्त प्रपोजल में एसटीपी प्लांट लगाने के बजाय कारखाने से निकलने वाले जहरीले पानी को एक नाले का निर्माण कर कारखाना से निकासी कर दूसरे पड़ोसी गांव पुठ खास ओर आजमपुर के जंगल में डाल दिया था। लेकिन वह नाला गांव आजमपुर में जाकर उसकी कोई निकासी न होने के चलते रुक जाने से गांव आजमपुर में दुर्गंध ओर गंदगी भरा जीवन जीने के लिए दशकों से ग्रामीण विवश है।
प्रदूषण से परेशान ग्रामीण कई वर्ष से प्रदूषण विभाग को शिकायत करते आ रहे है, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसके बाद पुठ खास ओर आजमपुर गांव के ग्रामीणों ने कई वर्ष पूर्व एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। कई बार एनजीटी की टीम डूंगर में संचालित चर्म शोधन कारखाने का जायजा लिया। ओर कारखाने से निकलने वाले प्रदूषित पानी का सैंपल लेकर गई। ओर जब जांच कराई तो सैंपल में घातक जहरीले प्रदूषण मिले। उसके बाद एनजीटी ने प्रशासन ओर प्रदूषण विभाग को तत्काल कारखाना को बंद करने के जन हित में आदेश दिए। उसके बाद कई बार प्रदूषण विभाग ने नोटिस दे कारखाने को बंद कराने का जिला प्रशासन को नोटिस दिया। लेकिन प्रशासन स्तर से कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई। तो एन जी टी ने सुनवाई करते हुए। पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन को दोषी मानते हुए दो अप्रैल को जिला अधिकारी को तलब किया। लेकिन जब डीएम बंदी के दिए गए आदेश पर कोई कार्यवाही न किए जाने का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। तो एन जी टी के न्यायधीश ने सुनवाई करते हुए जिला अधिकारी की कार्यवाही पर संदेह जाहिर करते हुए प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश को आगामी 17 अप्रैल को तलब किया। तो उसके बाद शनिवार को जिला प्रशासन की टीम डूंगर में पहुंची और एनजीटी की कार्यवाही से अवगत कराते हुए। उन्हें दो दिन का समय दिया कि वह या तो दो दिन में कारखाने को खाली कर दे। वरना सोमवार को प्रशासन स्तर से कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
लेकिन वही 50 परिवार कारखाना बंद होने से बेरोजगार हो जाएंगे। इस पर विचार विमर्श किया गया। ओर सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल, डीपीआरओ वीरेंद्र यादव, पॉल्यूशन विभाग की टीम के साथ गांव में पहुंचे ओर कारखाने का जायजा लिया। जिसमें मुख्य विकास अधिकारी ने पॉल्यूशन विभाग को समस्या के समाधान का विकल्प तलाश करने की हिदायत दी। जिसमें प्रदूषण अधिकारी राजेंद्र प्रसाद को गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए सीईपीटी प्लांट लगाने का प्रपोजल तैयार कर शासन को भेजने की सख्त हिदायत दी। ओर जो लोग कारखाने में काम कर रहे है सीडीओ ने उन सभी को भी साफ सफाई ओर मानक के अनुसार ही कार्य करने की सख्त हिदायत दी है।
पर्यावरण समिति के जिला सलाहकार मांगेराम शर्मा ने कहा कि सीईपीटी की स्थापना से कारखाना प्रदूषण मुक्त हो जायेगा। जिससे ग्रामीणों को जहां रोजगार भी मिलता रहेगा। ओर पड़ोसी ग्रामीणों को प्रदूषण से भी मुक्ति मिल जाएगी।
ये कहना है सीडीओ नूपुर गोयल का
डूंगर चर्म शोधन कारखाने से निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने के लिए सीईपीटी प्लांट लगाने के लिए प्रपोजल तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। उसके लगने से कारखाना प्रदूषण मुक्त हो जायेगा। स्टीमेट तैयार करने के लिए विभाग को हिदायत दे दी गई है।

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