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Saturday, April 18, 2026

​महिला आरक्षण बिल गिरने पर पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन: "नारी शक्ति के सपनों की राजनीतिक भ्रूण हत्या हुई"

विपक्ष ने नारी शक्ति के सपनों की राजनीतिक भ्रूण हत्या की है

नित्य संदेश

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की महिलाओं के प्रति अपना समर्थन और विपक्ष के प्रति कड़ा रोष व्यक्त किया। संसद के विशेष सत्र में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण विधेयक) के लोकसभा में पारित न हो पाने के कुछ ही घंटों बाद, प्रधानमंत्री ने इस घटनाक्रम को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक 'काला दिन' और 'दुर्भाग्यपूर्ण क्षण' बताया।

​विपक्ष पर कड़ा प्रहार

​प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "आज संसद के भीतर जो हुआ, उसने विपक्ष के महिला विरोधी चेहरे को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। करोड़ों महिलाओं के हक को रोककर विपक्ष ने उनकी आकांक्षाओं पर प्रहार किया है। यह बिल का गिरना नहीं, बल्कि नारी शक्ति के अधिकारों की 'राजनीतिक भ्रूण हत्या' है।" उन्होंने सदन में बिल गिरने के दौरान विपक्षी सदस्यों द्वारा किए गए व्यवहार को 'शर्मनाक' करार दिया।

​देश की महिलाओं से मांगी क्षमा

​संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने सीधे देश की माताओं, बहनों और बेटियों से संवाद करते हुए कहा, "मैं आज आप सभी से क्षमा मांगता हूं कि तमाम प्रयासों और स्पष्ट बहुमत की मंशा के बावजूद, स्वार्थी राजनीति ने इस पावन यज्ञ को पूर्ण नहीं होने दिया। लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपके सपनों को कुचलने वालों की पहचान अब देश के सामने स्पष्ट है।"

​संबोधन के मुख्य बिंदु 

​पाखंड का पर्दाफाश — पीएम ने कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी जैसे दलों का नाम लेते हुए कहा कि बाहर महिला सशक्तिकरण का नारा देने वाले दलों ने संसद के भीतर अपना असली 'नारी-विरोधी' चरित्र दिखाया है।

​2029 का संकल्प — प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह हार अंतिम नहीं है। उन्होंने संकल्प लिया कि 2029 के चुनाव तक महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार और संसद में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध रहेगी।

​जनता की अदालत में अपील — संबोधन के अंत में उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे इस 'अपमान' का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दें। उन्होंने कहा, "नारी शक्ति सब कुछ सह सकती है, लेकिन अपना अपमान नहीं। अब फैसला जनता की अदालत में होगा।"

​राजनीतिक गलियारों में हलचल

​विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह संबोधन आगामी चुनावों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। विपक्ष पर सीधा हमला बोलकर सरकार ने महिला आरक्षण के मुद्दे को एक बड़े चुनावी विमर्श में बदल दिया है। इस संबोधन के बाद देश भर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं मिलने की संभावना है।

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