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Wednesday, April 1, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय में महिला सशक्तिकरण पर व्याख्यान और लैंगिक रूढ़ियों पर राष्ट्रीय ई-क्विज का सफल आयोजन



नित्य संदेश ब्यूरो 


मेरठ।  सुभारती कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थ केयरस्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालयमेरठ द्वारा यूनिवर्सिटी जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल’ के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों और माइक्रो फाइनेंस के माध्यम से महिला सशक्तिकरण विषय पर एक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य छात्रों के बीच महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में SHGs (Self Help Groups) और माइक्रोफाइनेंस की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। 


यह व्याख्यान जेंडर सेंसिटाइजेशन सेल की प्रभारी डॉ. सारिका अभय द्वारा दिया गयाजिन्होंने कार्यक्रम में संसाधन व्यक्ति के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की अवधारणा को जमीनी स्तर की एक सशक्त पहल बताते हुए विस्तार से समझाया कि कैसे ये समूह महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और सामूहिक शक्ति प्रदान करते हैं। साथ ही उन्होंने माइक्रोफाइनेंस की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह विशेष रूप से ग्रामीण एवं वंचित वर्ग की महिलाओं को सुलभ वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। इस सत्र में छात्रों ने प्रश्न पूछकर अपने विचार साझा किए।


वहीं दूसरी ओरसुभारती कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर ने खिलौनों की मार्केटिंग और लैंगिक रूढ़ियाँ (Marketing & Gender Stereotypes)” विषय पर एक राष्ट्रीय ई-क्विज का भी सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस क्विज का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना था कि खिलौनों की मार्केटिंग समाज में लैंगिक भूमिकाओं और रूढ़ियों को किस प्रकार प्रभावित करती है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से छात्रों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने पर विशेष बल दिया गया, जिससे वे यह समझ सकें कि मार्केटिंग रणनीतियाँ किस प्रकार पारंपरिक लैंगिक मानदंडों को मजबूत करती हैं। देशभर के विभिन्न संस्थानों से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसमें लगभग 16 राज्यों की भागीदारी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का आयोजन बना दिया।


प्रतिभागियों ने उच्च स्तर की जागरूकता और समझ का प्रदर्शन कियाजिससे उनकी लैंगिक संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। यह आयोजन लैंगिक समानता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी मंच साबित हुआ। कुल मिलाकर, ये दोनों कार्यक्रम न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में उभरकर सामने आए। 

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