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Thursday, April 2, 2026

संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी और नियमित कर्मचारियों के निलंबन से गर्मियों में बिजली व्यवस्था चरमराने की आशंका



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन सुनियोजित तरीके से बिजली व्यवस्था को कमजोर करने पर आमादा है। गर्मियों से ठीक पहले बड़े पैमाने पर बिजली व्यवस्था संभाल रहे संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है और नियमित कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों एवं अभियंताओं को मनमाने ढंग से निलंबित किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में बिजली आपूर्ति पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ना तय है। 


संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान रहे कि खाड़ी में चल रहे युद्ध के चलते इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ने से आने वाली गर्मियों में बिजली की मांग बहुत अधिक बढ़ने वाली है। ऐसे में अनुभवी संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छटनी से बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय के अनुसार इस साल गर्मियों में देश में 270 गीगावाट तक बिजली की मांग जा सकती है जो विगत वर्ष 243 गीगावाट थी। इसी अनुपात में उप्र में भी बिजली की मांग लगभग 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है जो 36000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है। संघर्ष समिति ने कहा कि ऐसी स्थिति में बहुत ही अनुभवी और कुशल संविदा कर्मियों को हटाना कौन सी रणनीति है ? इन उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में आज प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों ने अपने-अपने कार्यालयों के बाहर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।


संघर्ष समिति ने कहा कि 11 अप्रैल को लखनऊ में संघर्ष समिति के सभी घटक संगठनों की केंद्रीय कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में प्रबंधन द्वारा निजीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों, उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों एवं भय का वातावरण बनाने की साजिश के खिलाफ विस्तृत चर्चा कर प्रदेशव्यापी आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन जानबूझकर गर्मियों से पहले बिजली व्यवस्था में लगे संविदा कर्मियों को हटाकर और नियमित कर्मचारियों को निशाना बनाकर भय का वातावरण तैयार कर रहा है, ताकि बिजली व्यवस्था प्रभावित हो और बाद में इसकी आड़ में निजीकरण को उचित ठहराया जा सके।


संघर्ष समिति के अनुसार वर्ष 2017 के आदेश के तहत शहरी क्षेत्रों में एक सबस्टेशन पर 36 कर्मचारियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मचारियों की व्यवस्था निर्धारित थी। लेकिन प्रबंधन ने इसे घटाकर क्रमशः 18.5 और 12.5 कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप पूरे प्रदेश में लगभग 2500 संविदा कर्मियों को हटाया जा चुका है। इसका सीधा असर आगामी गर्मियों में बिजली व्यवस्था पर पड़ना तय है। संघर्ष समिति ने बताया कि हाल के दिनों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर कई शहरों में बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की गई है। राजधानी लखनऊ (लेसा) में 340, अयोध्या में 52 और मेरठ में 193 संविदा कर्मियों को हटाया गया है। इसके चलते कई स्थानों पर 36 कर्मचारियों के स्थान पर मात्र 9 कर्मचारी ही कार्यरत रह गए हैं, जो बिजली व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए पूरी तरह अपर्याप्त हैं।


संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू की जा रही है, उन्हें भविष्य में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है। पश्चिमांचल, दक्षिणांचल एवं मध्यांचल के कई शहरों में यह प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे स्पष्ट है कि प्रबंधन निजीकरण के एजेंडे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा कर्मियों की छंटनी और नियमित कर्मचारियों के उत्पीड़न की कार्रवाई तत्काल बंद नहीं की गई, तो प्रदेशभर में व्यापक एवं निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।


गौरतलब है कि निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन आज 491वें दिन में प्रवेश कर गया है और प्रदेशभर में लगातार विरोध जारी है, मेरठ में विरोध सभा सिविल प्रांगण, विक्टोरिया पार्क मेरठ में आयोजित हुआ जिसमें इ० निखिल कुमार, इ० आलोक त्रिपाठी, इ० रोहित, इ० गोपीचंद, इ० अश्विनी, इ० गुरुदेव, इ० पीपी सिंह, भूपेंद्र ठाकुर, मो० कासिफ आदि मुख्यतः उपस्थित रहे।


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