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Thursday, April 2, 2026

झूठे मुकदमे में फंसाए गए वरिष्ठ पत्रकार के समर्थन में संयुक्त प्रेस क्लब रजिस्टर्ड का फूटा गुस्सा



डीआईजी कलानिधि नैथानी ने जांच बदलने की सहमति दी, थाना लालकुर्ती पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल


राहुल गौतम

नित्य संदेश, मेरठ। सदर निवासी वरिष्ठ एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार अविनाश कुमार सक्सेना को कथित रूप से साजिशन झूठे मुकदमे में फंसाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। संयुक्त प्रेस क्लब रजिस्टर्ड, मेरठ ने गुरुवार को खुलकर मोर्चा खोलते हुए पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मेरठ रेंज को ज्ञापन सौंपा और पुलिस की कार्यशैली पर तीखा सवाल खड़ा किया। 


अध्यक्ष अतुल महेश्वरी एवं महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर एवं पत्रकारों ने साफ शब्दों में कहा कि 45 वर्षों से निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे 68 वर्षीय अविनाश कुमार सक्सेना को एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया है। आरोप है कि 9 मार्च 2026 को बेगम बाग क्षेत्र में मेडिकल स्टोर संचालक और उसके पुत्र ने सक्सेना के साथ बेगम बाग चकबंदी कार्यलय वाली रोड मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद सक्सेना ने 11 मार्च 2026 को थाना लालकुर्ती में लिखित शिकायत और डाक विभाग की स्पीड पोस्ट से भी प्रार्थना पत्र भेजकर शिकायत दी और लगातार एसएसपी, उच्च अधिकारियों से, आइजीआरएस पोर्टलपर भी न्याय की गुहार बार बार लगाई, पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई थाना लालकुर्ती पुलिस के प्रभारी/ जांच अधिकारी विपक्ष से साज कर मिले हुए हैं 


शिकायतकर्ता वरिष्ठ पत्रकार बना पुलिस के खेल के चलते आरोपी 

हैरानी की बात यह रही कि थाना लालकुर्ती पुलिस प्रभारी/ एफआईआर के जांच अधिकारी ने पीड़ित पत्रकार की सबसे पहले दिए गए प्रार्थना पत्र शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय विपक्षी पक्ष को फायदा पहुंचाते हुए 18 मार्च को ही सक्सेना के खिलाफ एफआईआर संख्या 0048/2026 दर्ज कर दी। जबकि सक्सेना पहले से शिकायतकर्ता थे। पत्रकारों ने इसे थाना पुलिस की “पक्षपातपूर्ण और संदिग्ध कार्यशैली” बताते हुए कहा कि यह साफ तौर पर निर्दोष व्यक्ति को फंसाने का मामला है। इसके बाद 19 मार्च को सक्सेना की ओर से मारपीट, गाली गलौच, जान से मारने की धमकी आदि की एफआईआर संख्या 0049/2026 दर्ज हुई जो मीरा मेडिकल स्टोर के मालिक अरुण कुमार शर्मा, सौरभ शर्मा आरोपी है लेकिन तब तक पूरा मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर चुका था। आरोप यह भी लगाया गया कि थाना लालकुर्ती पुलिस लगातार सक्सेना पर समझौते का दबाव बना रही थी।


संयुक्त प्रेस क्लब ने दी चेतावनी

संयुक्त प्रेस क्लब ने दो टूक कहा कि एक ईमानदार और वरिष्ठ पत्रकार अविनाश कुमार सेक्ससेना को इस तरह प्रताड़ित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह न केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सीधा सीधा हमला है।

पत्रकारों ने मांग की कि:

झूठी एफआईआर संख्या 0048/2026 को तत्काल निरस्त किया जाए।

दोनों मामलों की जांच निष्पक्ष एजेंसी या अन्य सर्कल के उच्च अधिकारी से कराई जाए।

दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई हो।

अविनाश सक्सेना को सुरक्षा दी जाए और दबाव से मुक्त रखा जाए।


ज्ञापन देने वालों में अध्यक्ष अतुल महेश्वरी, महामंत्री धर्मेंद्र प्रताप सिंह तोमर, मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार अविनाश कुमार सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र चौहान, राहुल गौतम, सचिन भारती, सुरेश चंद्र जायसवाल, सरदार जसबीर सिंह समेत कई पत्रकार मौजूद रहे।


डीआईजी कलानिधि नैथानी ने लिया कड़ा संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी मेरठ रेंज कलानिधि नैथानी ने तत्काल प्रभाव से जांच को थाना लालकुर्ती से हटाकर अन्य सर्कल को बदलने की सहमति दी  इसे पत्रकारों ने “सच्चाई की जीत की पहली कदम” बताया है।

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