नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्रोफेसर प्रोफेसर मृदुल कुमार गुप्ता ने कहा कि डॉ. आंबेडकर केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने कहा कि आंबेडकर जी का जीवन संघर्ष, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का अद्वितीय उदाहरण है। आज के युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने के लिए आगे आना चाहिए। प्रो. गुप्ता ने यह भी कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके द्वारा व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर एक सशक्त समाज के निर्माण में योगदान दे सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आंबेडकर जी के आदर्शों—समता, बंधुत्व और न्याय—को अपने जीवन में आत्मसात करें।
साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद के समन्वयक प्रोफेसर कृष्णकांत शर्मा ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने भारतीय समाज को एक नई दिशा प्रदान की। उन्होंने सामाजिक समरसता, शिक्षा के प्रसार और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया। प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में आंबेडकर जी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, जब समाज को एकजुटता, सहिष्णुता और संवेदनशीलता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक रूप से बल्कि नैतिक एवं सामाजिक दृष्टि से भी जागरूक बनाएं, ताकि वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।
इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक वीरेंद्र कुमार मौर्य, प्रोफेसर वीरपाल सिंह, साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद की अध्यक्ष प्रोफेसर नीलू जैन गुप्ता, प्रोफेसर हरे कृष्णा, डॉ. अलका तिवारी, डॉ. जितेंद्र गोयल, डॉ. विवेक कुमार, डॉ. धर्मेंद्र कुमार, प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार, इंजीनियर प्रवीण पवार, इंजीनियर मनीष मिश्रा, इंजीनियर विकास त्यागी, अमरपाल, सर्वोत्तम शर्मा, शरद गिरी सहित अनेक अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

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