अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ के दो ग़ज़ल संग्रहों, ‘गुनगुनी धूप’ और ‘नज़र के कटघरे में’ का लोकार्पण
नित्य संदेश ब्यूरो
गाज़ियाबाद। केवल क़ाफ़िया और रदीफ़ आ जाना ग़ज़ल नहीं है। ग़ज़ल इश्क और मोहब्बत की जुबान है। ये उद्गार देश विदेश में विख्यात शायर विजेंद्र सिंह ‘परवाज’ ने व्यक्त किये।
वह साहित्यिक संस्था ‘गंगा-जमुनी अदब’ के तत्वाधान में आयोजित प्रख्यात शायर अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ के दो ग़ज़ल संग्रहों, ‘गुनगुनी धूप’ और ‘नज़र के कटघरे में’ के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए मौजूद साहित्यकारों, शायरों व कवियों को संबोधित कर रहे थे। यह आयोजन गाजियाबाद के कवि नगर रामलीला मैदान स्थित जानकी सभागार में हुआ। इसमें आज के दौर के नामचीन शायरों, कवियों, आलोचकों, साहित्यकारों ने शिरक़त की। समारोह का आरम्भ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सुविख्यात कवयित्री श्रीमती अंजू जैन ने मधुर कंठ से माँ वाणी की वंदना की।
इस मौके पर शायर विजेंद्र सिंह ‘परवाज’ ने कहा कि ग़ज़ल मोहब्बत की बात करती हैं। ग़ज़ल का मिज़ाज़ एकदम अलग होता है। ग़ज़ल के विषय अन्य रचनाओं से अलग हैं।
समारोह के मुख्य अतिथि जाने माने व्यवसायी, समाज-सेवी एवं हिंदी भवन समिति के महा-सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और विशिष्ट अतिथि जाने-माने शायर सीमाब सुल्तानपुरी रहे। मुख्य वक्ता के रूप में लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, सुरेन्द्र कुमार सिंघल, पवन कुमार, वेद प्रकाश शर्मा 'वेद' व सुभाष चन्दर के साथ अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ मंच पर आसीन रहे।
पुस्तक के विमोचन के उपरांत ग़ज़लकार पवन कुमार (आईएएस) ने अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ के दोनों ग़ज़ल संग्रहों एवं ग़ज़ल की विशेषताओं पर चर्चा में कहा कि अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ की इन दोनों पुस्तकों में ग़ज़ल की सभी विशेषताओं को पूरी महारत के साथ सरल भाषा में उतारा गया है। उनकी बात पाठकों तक ठीक वैसे ही पहुंची है जैसे शायर कहना चाहता है। लब्ध-प्रतिष्ठ शायर सुरेन्द्र कुमार सिंघल ने कहा कि शायर ने बिना किसी लाग लपेट के अपने शेरों में खरी-खरी बात बयान की है। उन्होंने संग्रह से एक शेर पढ़ा ‘चाहत थी मुझे आँखों से वो जाम पिलाए, वो चाय पिलाने को भी तैयार नहीं है’। उन्होंने कहा कि इन ग़ज़ल संग्रहों में शायर ने नफ़रतों के बीच मोहब्बत का पैग़ाम देती हुई ग़ज़लें कहीं है ।
साहित्यकार एवं व्यंग्यकार सुभाष चंद्र ने कहा कि उनके कुछ शेर मस्ती में लिखे गए हैं तो इनमें सरोकारों की तड़प भी दिखाई देती है। उन्होंने शेरों में पीड़ा और संघर्ष का कुशलता से अनुवाद किया है। सुप्रसिद्ध आलोचक वेद शर्मा वेद ने कविता और ग़ज़ल की रचनाकारी पर प्रकाश डालते हुए अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ की ग़ज़लकारी पर विस्तृत चर्चा की। विख्यात ग़ज़लकार लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने हिन्दी ग़ज़ल की दुष्यंत से लेकर आज तक की हिन्दी ग़ज़ल की यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी भी कविता या ग़ज़ल संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता समाज की धड़कनों को कविता या ग़ज़लों में पिरोना है। आतिश के दोनों ग़ज़ल संग्रह अपने समय की बात कहने में सफल हुए हैं।
नामचीन शायर सीमाब सुल्तानपुरी ने कहा की किताबों का विमोचन एक बच्चे के जन्मदिन की तरह ही होता है। उन्होंने अनिमेष शर्मा को ग़ज़लों के संग्रहों के लिए बधाई देकर कहा कि चूंकि ग़ज़लकार एक संगीतकार भी हैं तो उनकी ग़ज़लों में भी लय और बह्र का अनुशासन मिलता है। सलीके-मंद शायर ही अच्छा शायर होता है। अनिमेष शर्मा एक अच्छे शायर हैं।
समारोह में बहुत से गणमान्य व्यक्ति एवं साहित्यकार श्रोताओं के रूप में मौजूद रहे। इस अवसर पर डा. रमा सिंह, अंजू जैन, ममता किरन, मनोज अबोध, उत्कर्ष ग़ाफ़िल, योगेंद्र दत्त शर्मा, डॉ. वीणा मित्तल, वी. के. वर्मा ‘शैदी’, राज कौशिक, आलोक यात्री, विपिन जैन, चेतन आनंद, ऐन मीम कौशर, जगदीश पंकज, सोनम यादव, ईश्वर सिंह तेवतिया, पूनम माटिया, ऋचा सूद, डा. आरती बंसल, हेमेंद्र बंसल, नीरज कौशिक, गीता पांडे, राजीव उपाध्याय ‘कामिल’, विजय कुमार सिंह, दीपक श्रीवास्तव ‘नीलपद्म’, बृजेश सिंह, मनोज अबोध, डा. तारा गुप्ता, विनय विक्रम सिंह, डा. सुमन गोयल, सुधीर त्यागी, रवि पाराशर, सुभाष अखिल, अजय अज्ञात, रीता अदा, सरिता गर्ग, निवेदिता शर्मा, मीरा शलभ, मंजुला श्रीवास्तव, मोनू त्यागी, अवधेश श्रीवास्तव, अतुल जैन, राजेन्द्र जैन, सुधीर जैन, पीके अग्रवाल, एके सिंह, राजीव शर्मा, राजीव सिंघल, अक्षयवर श्रीवास्तव, डा. श्वेता त्यागी, रजनीश त्यागी राज आदि अनेकों अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।
इस अवसर पर संस्था की ओर से प्रबुद्ध साहित्यकारों और गणमान्य अतिथियों को पुष्प-गुच्छ, अंग-वस्त्र एवं शॉल देकर सम्मानित किया गया। गंगा-जमुनी अदब के अध्यक्ष अनिमेष शर्मा ने अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। समारोह का संचालन दीपाली जैन ‘जिया’ और सीमा शर्मा मेरठी ने किया।
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