नित्य संदेश ब्यूरो
मुंबई/नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत के लिए आज का दिन अत्यंत दुखद है। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका, स्वर साम्राज्ञी आशा भोंसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे देश और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका ऐसे जाना भारतीय संगीत के एक सुनहरे युग का अंत है।
सात दशकों का सुरीला सफर
8 सितंबर 1933 को जन्मी आशा भोंसले ने बेहद कम उम्र में गाना शुरू कर दिया था। उन्होंने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं में हजारों गानों को अपनी आवाज दी। उनकी आवाज की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। जहां एक ओर उन्होंने 'इन आंखों की मस्ती के' जैसी कालजयी गजलें गाईं, वहीं दूसरी ओर 'दम मारो दम' और 'पिया तू अब तो आजा' जैसे फुट टैपिंग गानों से हर पीढ़ी को अपना दीवाना बनाया।
उन्होंने सात दशकों से अधिक समय तक अपनी जादुई आवाज से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। शास्त्रीय संगीत से लेकर चुलबुले गानों और गज़लों तक, उनकी गायकी की विविधता अद्वितीय थी। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।
पुरस्कार और सम्मान
संगीत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया:
दादा साहब फाल्के पुरस्कार
पद्म विभूषण
दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
दुनिया भर में शोक
आशा ताई के निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित फिल्मी सितारों और खेल जगत की हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। संगीतकारों का मानना है कि भारतीय पार्श्व गायन (प्लेबैक सींगिग) में जो विविधता और ऊर्जा उन्होंने भरी थी, उसकी भरपाई करना नामुमकिन है।
उनकी कमी हमेशा खलेगी, लेकिन उनकी विरासत उनके हजारों गीतों के रूप में हमेशा जीवित रहेगी। संगीत प्रेमी उन्हें हमेशा उनके कालजयी गीतों के माध्यम से याद रखेंगे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
विनम्र श्रद्धांजलि!

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