नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। विधि अध्ययन संस्थान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय परिसर, मेरठ में प्री-पी0एच0डी0 कोर्सवर्क (विधि) के नवआगुन्तकों शोधार्थियों हेतु एक ओरिऐंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यकम का उद्घाटन माननीय प्रो0 एन0सी0 गौतम, मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति, महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, सतना, प्रो0 बीर पाल ंिसंह, निदेशक, शोध एवं विकास, प्रो0 आई0एम0 खान संकायाध्यक्ष (विधि) एवं डा0 विवेक कुमार, समन्वयक, प्री-पी0एच0डी0 कोर्सवर्क (विधि), चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
डा0 विवेक कुमार जी ने स्वागत भाषण दिया साथ ही कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुये कहा कि विधि के क्षेत्र में शोध का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि मेरठ विधिक शिक्षा से ऐतिहासिक सम्बन्ध रखता है स्वतंत्रता पूर्व उत्तर भारत के प्रमुख विधिक शिक्षण स्थान है। उत्तर भारत में मेरठ काॅलेज, मेरठ में सन् 1893 से विधि संकाय कार्य कर रहा है। उन्होने कहा कि महर्षि गौतम ने सोलह पदार्थ के आधार पर विधिशास्त्र का उल्लेख किया है जिनमे मुख्य रूप से प्रमाण, प्रमेय, तर्क, निर्णय, छल, जाति एवं निग्रह आदि को विधि का आधार बताया है। उन्होने विधिशास्त्री स्टेमलर के बारे मे बताते हुए कहा कि विधिशास्त्री स्टेमलर ने कानून बनाने मे किसी ठोस पैमाना/तर्क को आधार बनाना चाहिए ताकि कानूूनो मे एकरूपता रहे।उन्होने आगे कहा कि चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने विधि की महान विभूति दी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चै0 चरण सिंह के बारे मे बताया कि उन्होने देश को नई दिशा दी है वे भी विधि के छात्र रहे है। उन्होने सर्वोच्च न्यायालय के मा0 न्यायमूर्ति पंकज मित्थल, उ0प्र0 उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल, न्यायमूर्ति कृष्ण पहल, न्यायमूर्ति विवेक चैधरी एवं प्रो0 के0पी0एस0 महलवार, प्रो0 इंन्द्रायन आदि विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र है। विधि के क्षेत्र में न्यायाधीश, प्रोफेसर, अधिवक्ता एवं अन्य के रूप में चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, के विद्यार्थी एवं शोधार्थी के रूप में अपना योगदान दे रहे है। उन्होंने विधि के विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम करते हुये समाज में अपने शोध द्वारा बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया तथा विधि के शोधार्थियों को शुभकामनायें दी।
प्रो0 आई0एम0 खान जी ने ओरिऐंटेशन प्रोग्राम में अपने विचार रखते हुये कहा कि कोर्सवर्क शोध की नीव है उन्होने शोध का महत्व बताते हुए कि शोध का प्रकार कैसा हो समाज मे वर्तमान समस्याओ को ध्यान मे रखते हुए अपने रिर्सच का क्षेत्र तय करना चाहिए और उसका अपने शोध के माध्यम से समाधान खोजना चाहिए समाज मे दो प्रकार से शोध विषय चुनना चाहिए पहला वे क्षेत्र जहा पहले से ही कानून है उस कानून मे क्या कमी है और उसे कमी को दूर करने के लिए आप क्या सुझाव दे सकते है। दूसरा ऐसे क्षेत्र जहा कानून नहीं है तो उस क्षेत्र मे क्या कानून होना चाहिए। शोध मे निरन्तरता एवं मौलिकता अनिवार्य है शोधार्थियों को सैमिनार, वर्कशाप और सुपरवाईजर के मार्गदर्शन मे रहते हुए सैमिनार, वर्कशाप और शोधकार्य करना चाहिए। उन्होने शोधार्थियो को शोध के क्रम एवं परीक्षा की रूपरेखा के बारे मे जानकारी दी।
प्रो0 बीर पाल सिंह जी ने कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुये कहा कि शिक्षा के क्षेत्र मे पी0एचडी0 बहुत बडी उपलब्धी है उन्होने नैट, जे0 आर0 एफ0 विधार्थियों का उत्शाहवर्धन किया और कहा कि आप एक उच्चकोटि के विश्वविद्यालय से शोधकार्य कर रहे है। शोधार्थियों को चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की उपलब्ध्यिों की जानकारी देते हुये कहा कि हमारा विश्वविद्यालय का नैक में ।़़ ग्रेड है। विभिन्न मानकों पर देशभर के उच्च शैक्षिण संस्थानों के लिए एनआईआरएफ चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने टाॅप 41 विश्वविद्यालय की सूची में अपना स्थान प्राप्त किया है। उत्तर प्रदेश राज्य में चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का उच्च स्थान है एवं राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हमारे विश्वविद्यालय ने अच्छा प्रदर्शन किया है। साथ ही क्यूएस रैकिंग के बारे में भी जानकारी दी। जिसमें उन्होंने बताया कि क्यूएस रैकिंग में विश्वविद्यालय ने 219वाँ स्थान प्राप्त किया है।
प्रो0 एन0सी0 गौतम जी द्वारा अध्यक्षीय भाषण में शोधार्थियों को शुभकामनायें देते हुये कहा कि सफलता कभी भी स्थायी नही है इसलिए सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और नकारात्मक विचारो से दूर रहना चाहिए और जीवन मे धैर्य का पालन अवश्य करना चाहिए। उन्होने विधार्थियो को बताया कि आज विधि पहली पसन्द है उसके लिए आपको परिश्रम करना चाहिए उन्होने कहा कि एक लक्ष्य के साथ काम करोगे तो विकल्प खुलते जायेगे उन्होने अच्छी किताबे और शोधपत्र पडने के लिए शोधार्थी को प्रेरित किया। उन्होने कहा कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है, उन्होेने कहा कि उनके जीवनकाल मे विधि अध्ययन- स्टडी वाई चांस से स्टडी वाई चोईस का सफर तय किया है जो उसकी प्रांसगिकता का घोतक है। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री आशीष कौशिक ने किया एवं कार्यक्रम में श्रीमति सुदेशना ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में प्रो0 वैशाली पाटिल, डा0 विकास कुमार, डा0 अपेक्षा चैधरी डा0 सुशील कुमार शर्मा, डा0 धनपाल सिंह, डा0 मीनाक्षी,डा0 धर्मेन्द्र, डा0 शेख अरशद, श्रीमति उपासना एवं शोधार्थी उपस्थित रहें।


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